(देहरादून)27अक्टूबर,2026.
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस सुधीर सिंह को उत्तराखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। फिलहाल पटना हाईकोर्ट में कार्यरत जस्टिस सिंह का चंडीगढ़ से भी जुड़ाव रहा है। कॉलेजियम ने 26 अक्टूबर को हुई बैठक में यह सिफारिश की। हालांकि, उनकी नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार की औपचारिक अधिसूचना जारी होना अभी बाकी है।
जस्टिस सुधीर सिंह का पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में तबादला वर्ष 2023 में हुआ था। उन्होंने 2 नवंबर, 2023 को हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने 14 जुलाई, 2025 को उन्हें वापस पटना हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की अधिसूचना जारी की थी।
वकालत से न्यायाधीश तक का सफर:
जस्टिस सुधीर सिंह ने 1991 में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया था। न्यायाधीश बनने से पहले उन्होंने दो दशक से अधिक समय तक वकालत की। पटना हाईकोर्ट की आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने रांची के विकास विद्यालय से स्कूली शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद पटना कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और पटना लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की।
वकालत के दौरान उन्होंने भारत सरकार के केंद्रीय अधिवक्ता, रेल मंत्रालय के रेलवे अधिवक्ता और भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा विभाग के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता के रूप में सेवाएं दीं। वह पटना हाईकोर्ट में भारत सरकार के सहायक सॉलिसिटर जनरल भी रहे। उनकी वकालत का प्रमुख क्षेत्र आपराधिक और रिट मामले रहे।
उन्हें 15 अप्रैल, 2015 को पटना हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। 20 अप्रैल, 2016 को वह स्थायी न्यायाधीश बने।
जस्टिस सिंह का परिवार भी कानूनी क्षेत्र से जुड़ा रहा है। उनके पिता जस्टिस एनपी सिंह सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हैं। उन्होंने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण की अध्यक्षता भी की थी। उनके दादा बलदेव प्रसाद सिंह बैरिस्टर थे और पटना हाईकोर्ट में वकालत करते थे। वह लंबे समय तक वहां की बैरिस्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे।
चंडीगढ़ और नैनीताल के बीच न्यायिक संबंध:
जस्टिस सुधीर सिंह की प्रस्तावित नियुक्ति पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और उत्तराखंड हाईकोर्ट के बीच न्यायाधीशों की नियुक्तियों और तबादलों के सिलसिले की एक और कड़ी होगी। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर वर्ष 2009 में उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे थे। इससे पहले वह पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी सेवाएं दे चुके थे।
जस्टिस राजीव शर्मा भी दोनों हाईकोर्ट में कार्यरत रहे। उत्तराखंड हाईकोर्ट में उनके कार्यकाल के दौरान गंगा और यमुना नदियों से जुड़े पर्यावरणीय मामलों में महत्वपूर्ण आदेश दिए गए। बाद में चंडीगढ़ की सुखना झील के कानूनी दर्जे से संबंधित उनके फैसले की भी चर्चा हुई।
जस्टिस रितु बाहरी ने भी दोनों संस्थानों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम किया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहने के बाद वह फरवरी 2024 में उत्तराखंड हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनीं। वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला थीं। अक्टूबर 2024 में वह सेवानिवृत्त हुईं।
जस्टिस सुधीर सिंह की नियुक्ति से इस न्यायिक संबंध को एक और आयाम मिलने की संभावना है। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए वह पहले से परिचित न्यायिक चेहरा हैं। उनकी नियुक्ति संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने और केंद्र सरकार की औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही प्रभावी होगी।(साभार एजेंसी/सोशल मीडिया)


