(हरिद्वार)15सितंबर,2026
देव संस्कृति विश्वविद्यालय में मंगलवार को एआई फॉर डेमोक्रेसी विषय पर अंतरराष्ट्रीय समिट का आयोजन किया गया। समिट के समापन सत्र में मुख्य अतिथि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने प्रतिभाग किया। इस दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लोकतंत्र, सुशासन, जनभागीदारी और मानव कल्याण पर पढ़ने वाले प्रभावों को लेकर देश-विदेश के विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल गुल्मीत सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि वर्तमान को बदलने वाली महत्वपूर्ण शक्ति बन चुकी है। इसका उपयोग जनहित, सुसासन और लोकतंत्र की मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि एआई का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
राज्यपाल ने कहा कि एआई शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने और नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ पारदर्शिता, सत्य और जिम्मेदारी भी जरूरी है। एआई में किसी भी प्रकार का पक्षपात समाज में असमानता को बढ़ा सकता है।
उन्होंने कहा कि नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों में मानवीय जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है। एआई निर्णय लेने में सहायता कर सकती है, लेकिन मानय विवेक और जिम्मेदारी का स्थान नहीं ले सकती। न्याय व्यवस्था में भी इसका उपयोग सहायक के रूप में किया जाना चाहिए। भारत की ज्ञान परंपरा हमें सिखाती है कि ज्ञान का उद्देश्य लोक कल्याण होना चाहिए।
उत्तराखंड के संदर्भ में राज्यपाल ने कहा कि एआई का उपयोग आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि-बागवानी, पर्यावरण संरक्षण, चारधाम यात्रा और भीड प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। तकनीक की सफलता का वास्तविक पैमाना यह है कि उससे आम लोगों का जीवन कितना बेहतर हुआ। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें तकनीक सीखने और नवाचार करने के साथ यह भी विचार करना चाहिए कि किसी तकनीक से क्या किया जा सकता है के साथ-साथ ‘क्या किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि एआई मानवता को बांटने वाली नहीं, बल्कि जोड़ने वाली शक्ति बने। ज्ञान के साथ विवेक, तकनीक के साथ नैतिकता और नवाचार के साथ जिम्मेदारी ही एआई के बेहतर उपयोग का आधार होना चाहिए।
इस अवसर पर वीडियो संदेश के माध्यम से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि एआई के विकास के साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने नई संभावनाओं के साथ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। एआई का उपयोग पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी बढ़ाने तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक का विकास मानव हित और लोकतांत्रिक मूल्यों को केंद्र में रखकर होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि लोकसभा में भी एआई का उपयोग किया जा रहा है।
समिट की अध्यक्षता कर रहे देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा तकनीकी विकास को हमेशा मानव कल्याण से जोड़कर देखती रही है। एआई को मानव बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि मानव क्षमता के विस्तार का माध्यम बनाना होगा। मानवीय मूल्यों से जुड़ा एआई ही लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, समावेशी और जनकेंद्रित बना सकता है।
लंदन स्थित सेंटर फॉर टुमॉरो के संस्थापक अध्यक्ष डेक्स इंटर टोरिक ने कहा कि एआई का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए तकनीकी विकास के साथ सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। सरकार, उद्योग और समुदाय को मिलकर ऐसी तैयारी करनी होगी, जिससे एआई समान अवसर, मानव कल्याण और समावेशी विकास का आधार बन सके।
समिट में एआई, लोकतांत्रिक संस्थाओं, सार्वजनिक नीति, नागरिक भागीदारी, डिजिटल विश्वसनीयता और भविष्य की शासन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर ‘एआई फॉर डेमोक्रेसी’ विषय पर आयोजित विभित्र प्रतियोगिताओं के विजेताओं को अतिथियों ने सम्मानित किया। साथ ही एआई आधारित पत्रिका सहित अनेक पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
समिट में आईपीयू जेनेवा की महासचिव एण्डा फिलिप, द ब्रिटिश यूनिवर्सिटी इन इजिप्ट के डीन प्रोफेसर इब्राहिम सतामा, सेंटर फॉर टुमौरी के संस्थापक अध्यक्ष एवं एआई और सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ डेक्स हंटर टोरिक, ब्रिटिस हाई कमीशन नई दिल्ली के प्रमुख टेक पॉलिसी हैरी फिसर, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. विजय धस्माना, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, मनु गौड़ सहित देश-विदेश के अनेक विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया।(साभार एजेंसी)
