“आपदा जोखिम न्यूनीकरण” कार्यशाला आयोजित

Uttarakhand News

(नैनीताल) 08अगस्त,2926

सरोवर नगरी से महज 22 किलोमीटर दूर भीमताल विकास भवन सभागार में आपदा जोखिम न्यूनीकरण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें केबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला का शुभारंभ मंत्री पंचायती राज, आपदा प्रबन्धन एवं पुनर्वास, आयुष व आयुष शिक्षा, पुनर्गठन एवं जनगणना उत्तराखंड सरकार मदन कौशिक द्वारा किया गया किया।

इस अवसर पर आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा
जब भी उत्तराखंड में कही भी आपदा आयी तो सबसे पहले सरकार के नुमाइंदों ने जाकर वहां पहल की। इसका उदाहरण उत्तरकाशी है। उन्होंने यह भी कहा कही भी आपदा के सम्बंध में धनराशि आड़े नहीं आयेगी।जो खर्चा आदि होगा उसे सरकार तुरंत निपटाने का कार्य करेगी। उन्होंने जिला अधिकारी ललित मोहन रयाल से भी कहा अगर आपदा से सम्बंधित कोई धनराशि रह गई तो उसका स्टीमेट बना कर शीघ्र भेजा जाये। जिससे धनराशि मुहैया कराई जाये।
कहा कि उत्तराखंड राज्य ने गत वर्षो में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अनेक उल्लेखनीय कार्य किए हैं उन्होंने कहा कि आज पूरा देश यह मानता है कि उत्तराखंड राज्य में आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण में राज्य में बेहतर कार्य किए हैं राज्य में बड़ी-बड़ी आपदा के समय त्वरित राहत एवं बचाव कार्य किए गए हैं जिसके परिणाम स्वरूप क्षति को कम किया गया।

उन्होंने कहा कि आपदा क्षेत्र से सभी विभागों एजेंसी और संगठनों को लगातार जोड़ा जा रहा है इसी उद्देश्य से यह कार्यशाला प्रत्येक जनपद स्तर पर आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री हमेशा ही आपदा के दृष्टिगत संवेदनशील रहते हैं आपदा तंत्र को प्रदेश में मजबूत करने का कार्य किया जा रहा है। इस क्षेत्र में लगातार नए प्रयास के साथ ही नई तकनीकी अपनाई जा रही है सूचना तंत्र को मजबूत करने के साथ ही रिस्पांस टाइम भी कम किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री आपदा की दृष्टि से हमेशा संवेदनशील एवं गंभीर रहते हैं। राज्य में आपदा प्रबंधन तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इसके लिए नए प्रयासों के साथ आधुनिक तकनीक को भी अपनाया जा रहा है। सूचना तंत्र को मजबूत करने के साथ ही आपदा के समय रिस्पांस टाइम को कम करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव दल शीघ्र मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई कर सके। उन्होंने कहा कि बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक और त्वरित प्रतिक्रिया के माध्यम से प्रदेश में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य ने पिछले वर्षों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। आपदा प्रबंधन को और सुदृढ़ करने हेतु प्रदेश के सभी जनपदों में कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल संसाधनों की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा के समय में उनका अधिकतम उपयोग करना भी है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा रिस्पॉन्स टाइम कम करने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

मंत्री ने कहा कि बेहतर आपदा प्रबंधन के लिए सामुदायिक सशक्तिकरण जरूरी है और इस दिशा में आपदा प्रबंधन विभाग लगातार नई पहल कर रहा है तथा नवीन तकनीकी को अपना रहा है।
कार्यशाला में राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने कहा कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है कि आपदा प्रबंधन को लेकर जनपद स्तर पर विभागों के मध्य बेहतर आपसी सामंजस्य बना रहे, तथा वह आपदा के प्रति सजग रहें। और उन्हें आपदा प्रबंधन के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री आपदा प्रबंधन को लेकर बेहद संजीदा व सचेत रहते हैं और आपदा में त्वरित निर्णय लेकर कार्य करते हैं तथा आपदा क्षेत्र में स्वयं पहुंच कर त्वरित रिस्पॉन्स करते हैं।

कार्यशाला में आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष ले. कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी (से.नि.) ने आपदा के दौरान त्वरित रिस्पॉन्स,खोज बचाव राहत व आपदा प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों, अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त अधिकारियों तथा जवानों को राज्य के आपदा प्रबंधन तंत्र से जोड़ा जाएगा ताकि उनके अनुभव का लाभ राज्य तथा आपदा प्रबंधन विभाग को मिल सके।

कार्यशाला में अपर सचिव आपदा प्रबंधन प्रकाश चन्द्र ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश के सभी जनपदों में यह कार्यशाला आयोजित की जा रही है।इसमें आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं के साथ ही क्षमता विकास के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यशालाओं का उद्देश्य विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आपदा जोखिम न्यूनीकरण, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, आपदा के दौरान समन्वित कार्यवाही तथा आधुनिक आपदा प्रबंधन तंत्र के प्रति प्रशिक्षित एवं संवेदनशील बनाना है।

कार्यशाला के तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने आपदा से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। डॉ. पी.डी. माथुर ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के फ्रेमवर्क एवं लक्ष्यों, डॉ. वेदिका पंत ने Incident Response System (IRS) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा रोहित कुमार ने जीआईएस प्रणाली, सचेत एप एवं निखिल पुनिया ने आपदा प्रबंधन क्षमता विकास, IDRN पोर्टल से संबंधित एवं मोबाइल ऐप के उपयोग की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त कार्यशाला में आपदा की तैयारी, पूर्व चेतावनी प्रणाली, बचाव कार्यों एवं व्यवहारिक प्रबंधन के बिंदुओं पर भी चर्चा की गई।

इससे पूर्व जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल माननीय मंत्री का बुके भेंट कर स्वागत करते हुए मानसून काल में जनपद में प्राकृतिक आपदा से अब तक हुए नुकसान एवं राहत कार्यों सहित पुनर्निर्माण कार्यों हेतु विभागों को आवंटित धनराशि के बारे में जानकारी दी गई।

कार्यशाला में विधायक नैनीताल सरिता आर्या, अध्यक्ष जिला पंचायत दीपा दरमवाल, राज्य आपदा सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष विनय रोहेला, रघुवीर सिंह भंडारी, दर्जा राज्य मंत्री भावना मेहरा, ब्लॉक प्रमुख हरीश बिष्ट, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पाण्डे,अपर जिलाधिकारी सौरभ असवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी आदि उपस्थित रहे।(साभार सू वि)

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