(देहरादून)3मार्च,2026
प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए सरकार प्रत्येक जनपद में एक-एक माडल सहकारिता गांव स्थापित करेगी। इस महत्वाकांक्षी योजना को शीघ्र धरातल पर उतारने के लिए विभागीय अधिकारियों को विस्तृत रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सहकारिता मंत्री डा धन सिंह रावत ने आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया कि संस्कृत गांव की तर्ज पर माडल सहकारिता गांव विकसित किए जाएं।
इन गांवों में सहकारी बैंक, कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) और सहकारी बाजार स्थापित किए जाएंगे। सहकारी बाजार के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों, किसान समूहों और ग्रामीण उत्पादकों को अपने उत्पादों के विपणन के लिए सशक्त मंच उपलब्ध होगा।
उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना और सहकारिता आधारित आत्मनिर्भर मॉडल विकसित करना है।
इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा।
बैठक में सहकारी समितियों के 50 सचिवों को अध्ययन भ्रमण के लिए गुजरात भेजने का निर्णय भी लिया गया।
इसमें नवगठित एवं प्रारंभिक अवस्था में कार्यरत समितियों के सचिवों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि वे वहां के सफल सहकारी माडलों का अध्ययन कर अपने क्षेत्रों में लागू कर सकें।
डा रावत ने निर्देश दिए कि होली के बाद संयुक्त निबंधक,अपर निबंधक एवं प्रभारी अधिकारी जनपदों में ब्लाक स्तर पर समीक्षा बैठकें आयोजित करें। घाटे में चल रही समितियों को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर उसे लागू किया जाएगा।
उन्होंने सभी पैक्स एवं एमपेक्स समितियों की नियमित बोर्ड बैठकें सुनिश्चित करने, सहकारी बैंकों में शत-प्रतिशत नियुक्तियां आईबीपीएस के माध्यम से पारदर्शी ढंग से करने तथा 15 मार्च तक भर्ती विज्ञापन जारी करने के निर्देश भी दिए।
साथ ही योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार स्थानीय भाषाओं में करने पर जोर दिया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि माडल सहकारिता गांव राज्य में आत्मनिर्भर एवं समावेशी ग्रामीण विकास की दिशा तय करेगा।(साभार एजेंसी)
