(नई दिल्ली)30जनवरी,2026.
महज पांच वर्ष की उम्र में करंट लगने से अपने दोनों हाथ गंवाने वाले आयुष का कोई स्कूल दाखिला लेने के लिए तैयार नहीं था। ड्राइवर पिता ने जब अपनी कंपनी की अधिकारी से बेटे का दाखिला कराने की गुहार लगाई, तो उन्होंने कटरा स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड तीरंदाजी अकादमी से संपर्क साधा।
इस अधिकारी के सामने बिना भुजाओं की तीरंदाज शीतल देवी का उदाहरण था। आयुष को कटरा ले जाया गया। वहां आयुष की पढ़ाई के साथ तीरंदाजी का प्रशिक्षण शुरू हुआ। महज सात माह में आयुष 30 जनवरी से एनआईएस पटियाला में शुरू हो रही राष्ट्रीय चैंपियनशिप में खेलने जा रहा है। कोच कुलदीप का दावा है, आयुष दुनिया का सबसे युवा बिना हाथों (आर्मलेस) का तीरंदाज है। आयुष ने कहा, वह पदक जीतने की पूरी कोशिश करेगा।
लगा था 11,000 वोल्ट का करंट : बुलंदशहर के भुन्ना जट्टां गांव के आयुष ने कहा कि वह चाचा के यहां गया था, जहां उसे 11,000 वोल्ट का करंट लग गया था। आयुष राष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में खेलने वाला दुनिया का सबसे युवा तीरंदाज भी बनेगा। वह कंधे व पैर के सहारे निशाना लगाता है। उसने 360 में से 297 का स्कोर किया है।
पहली बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप में खेलेंगे बिना भुजाओं के 5 तीरंदाज
हाथों के बिना अभिशाप बन चुके जीवन में माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड तीरंदाजी अकादमी ने सपनों के रंग भरने का काम किया है। कुछ वर्ष पूर्व बिना बाजुओं की तीरंदाज शीतल देवी को सामने वाले लाने वाले कोच कुलदीप वेदवान और अभिलाषा चौधरी के दम पर इस बार राष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में बिना हाथों के पांच तीरंदाज शिरकत करने जा रहे हैं।
यह पहली बार है जब एनआईएस पटियाला में 30 जनवरी से शुरू हो रही राष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में बिना बाजुओं के पांच तीरंदाज भाग ले रहे हैं। पैरा ओलंपिक पदक जीतने वाले शीतल देवी, बिना बाजुओं और बिना पैरों की तीरंदाज पायल नाग, छह साल के आयुष, सेना में कार्यरत 39 साल के मनोज यादव और 42 वर्षीय सौरभ पाठक के हौंसलों की उड़ान इस बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप में दिखाई देगी।
तीरंदाज की मां आयुष को पढ़ाती हैं ट्यूशन
आयुष इस चैंपियनशिप में खेलने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के बिना हाथों के तीरंदाज होंगे। कुलदीप बताते हैं कि आयुष के ड्राइवर पिता की गुरुग्राम स्थित कंपनी में अधिकारी ने जब उनसे संपर्क साधा तो उन्होंने उसे तीरंदाजी सिखाने के लिए तुरंत हामी भर दी। उन्होंने धनौरा (बागपत) स्थित अपनी अकादमी में आयुष का टेस्ट लिया, तो उसमें तीरंदाजी सीखने के गुण दिखे। उन्हें यह बात चुभ गई थी कि आयुष को कोई स्कूल एडमिशन देने को तैयार नहीं हो रहा था। वह आयुष को तीरंदाजी सिखाने के साथ माता ऑनलाइन क्लास भी लगवाते हैं और एक तीरंदाज की मां उन्हें ट्यूशन भी पढ़ाती है।
सौरभ और मनोज को भी करंट लगने से गंवाने पड़े थे हाथ…सिर्फ आयुष ही नहीं दिल्ली टूरिज्म विभाग में कार्यरत 42 वर्षीय सौरभ पाठक की भी यह पहली राष्ट्रीय चैंपियनशिप होगी।सौरभ को भी करंट लगाने के कारण अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े थे।बरेली (यूपी) निवासी सेना में कंप्यूटर ऑपरेटर मनोज यादव दूसरी बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप में खेलेंगे।मनोज को भी करंट लगाने के कारण अपने हाथ गंवाने पड़े थे(साभार एजेंसी)
