(देहरादून)25जुलाई,2026.
देहरादून में नशे के कारोबार पर अब निर्णायक प्रहार की तैयारी शुरू हो गई है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति (NCORD) की बैठक में साफ संदेश दिया कि युवाओं की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले नशा तस्करों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पुलिस को पुराने अपराधों का GIS विश्लेषण कर नशे के हॉटस्पॉट चिन्हित करने और वहां लक्षित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
डीएम ने कहा कि चाय-तंबाकू की ठेलियों, मेडिकल स्टोरों, स्लम बस्तियों, छात्रावासों, पीजी और कोचिंग संस्थानों तक कड़ी निगरानी रखी जाए। ई-ड्रग्स और केमिकल ड्रग्स के बढ़ते नेटवर्क पर चिंता जताते हुए उन्होंने एएनटीएफ, एसटीएफ, पुलिस, एनसीबी और औषधि विभाग को संयुक्त अभियान चलाकर नशे की पूरी सप्लाई चेन ध्वस्त करने के निर्देश दिए।
युवाओं को नशे से बचाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में एंटी-ड्रग्स, साइबर क्राइम और वित्तीय अपराध से जुड़े विषय शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं छात्रावासों, पीजी और शिक्षण संस्थानों में सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने तथा एंटी ड्रग्स हेल्पलाइन-1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया।
डीएम ने सभी एसडीएम को जिले के नशा मुक्ति केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने और मानकों का उल्लंघन मिलने पर तत्काल सील करने के निर्देश दिए। साथ ही सेलाकुई में 30 बेड के नए नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र का प्रस्ताव शासन को भेजने के आदेश भी दिए।
बैठक में बताया गया कि जिले में 151 एनडीपीएस मुकदमे दर्ज किए गए हैं और 170 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। वहीं 711 छात्रों के ड्रग टेस्ट कराए गए, जिनकी सभी रिपोर्ट नेगेटिव आईं। मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी अनिवार्य कर दिए गए हैं और फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति में दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। डीएम ने सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
