अलनीनो : जुलाई से दिसंबर तक रहेगा असर

National News

(नई दिल्ली)16जून,2026.

एशिया-प्रशांत क्षेत्र के मौसम पूर्वानुमान केंद्र एपीईसी क्लाइमेट सेंटर (APCC) ने अल नीनो को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। केंद्र ने अपने नए अनुमान में कहा है कि अल नीनो अब एक मजबूत (Strong) घटना के रूप में विकसित हो सकता है और इसके जुलाई से दिसंबर 2026 तक बने रहने की 100 प्रतिशत संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, साल के अंत तक अल नीनो का प्रभाव और अधिक तीव्र हो सकता है, जिससे दुनिया के कई हिस्सों के साथ भारत के मौसम पर भी असर पड़ने की आशंका है।

क्या है अल नीनो?:
अल नीनो एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से के समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि होती है। इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पैटर्न पर पड़ता है और भारत में अक्सर यह कमजोर मानसून और कम बारिश से जुड़ा माना जाता है।

जुलाई में बढ़ेगा प्रभाव,दिसंबर तक रहेगा चरम:
अल नीनो की निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाला नीनो 3.4 इंडेक्स जुलाई में 1.97 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है, जो अल नीनो की सीमा से काफी ऊपर है। APCC के अनुसार, यह इंडेक्स दिसंबर तक बढ़कर 3.14 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जो एक बेहद मजबूत एल नीनो की स्थिति को दर्शाता है।

भारत में मानसून पर पड़ सकता है असर
रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई से सितंबर के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय भारत में सामान्य से काफी कम बारिश हो सकती है। अनुमान के अनुसार, इस अवधि में 53.8 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज हो सकती है, जो एशिया में सबसे अधिक संभावित कमी मानी जा रही है।
सामान्य बारिश की संभावना: 24.9%
सामान्य से अधिक बारिश की संभावना: 21.4%
सामान्य से कम बारिश की संभावना: सबसे अधिक

किन राज्यों में ज्यादा असर पड़ सकता है?:
रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ, पश्चिमी मध्य प्रदेश, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर के कुछ हिस्सों में बारिश की सबसे अधिक कमी देखी जा सकती है। वहीं, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सामान्य से कम या सामान्य बारिश होने की संभावना है।

कुछ क्षेत्रों के लिए राहत की खबर:
हालांकि,पूरे देश में स्थिति एक जैसी नहीं रहने वाली है। ओडिशा और पश्चिम बंगाल में सामान्य बारिश हो सकती है। पूर्वोत्तर भारत और बांग्लादेश के आसपास के क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा होने का अनुमान है।

अक्टूबर के बाद सुधर सकते हैं हालात:
APCC की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर के बीच मौसम की स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है। यह अवधि दक्षिण भारत के लिए उत्तर-पूर्व मानसून और देश के अन्य हिस्सों में रबी फसलों की तैयारी का समय होती है। इस दौरान दक्षिण भारत में सामान्य से थोड़ी कम बारिश हो सकती है, लेकिन मजबूत एल नीनो की स्थिति में उत्तर-पूर्व मानसून अपेक्षाकृत बेहतर रहने की संभावना रहती है।

इन राज्यों में हो सकती है अच्छी बारिश:
अक्टूबर-दिसंबर के दौरान पश्चिम और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। इसका लाभ गुजरात, राजस्थान, उत्तर मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को मिल सकता है। इसके अलावा उत्तरी राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भी सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया गया है।

किसानों के लिए क्या है संदेश?
विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों को जल संरक्षण, नमी प्रबंधन और वैकल्पिक फसलों की योजना पर ध्यान देना चाहिए। राज्य सरकारों और कृषि विभागों को भी समय रहते जिलावार कंटिंजेंसी प्लान तैयार करने की जरूरत है, ताकि मौसम की चुनौती का प्रभाव कम किया जा सके। अल नीनो की यह चेतावनी आने वाले खरीफ सीजन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है और इससे कृषि, जल संसाधन तथा खाद्य सुरक्षा से जुड़ी रणनीतियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी(साभार एजेंसी)

Share it

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *