(नई दिल्ली)31मई,2026
तमिलनाडु सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए 2,044.46 करोड़ रुपये की फसल ऋण माफी योजना का एलान किया है। सरकार के अनुसार, सहकारी बैंकों से लिए गए 50,000 रुपये तक के ऋण पूरी तरह माफ किए जाएंगे और इससे अधिक के बकाए पर अलग-अलग स्लैब के तहत छूट दी जाएगी। इस फैसले से राज्य के 14,22,000 किसानों को लाभ पहुंचेगा।
ऋण माफी के नियम और छूट का दायरा
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, जिन सीमांत किसानों पर 50,000 रुपये से कम का कर्ज है, उनका पूरा कर्ज माफ कर दिया जाएगा। वहीं, छोटे किसानों को 50,000 रुपये तक के कर्ज पर 50 प्रतिशत की राहत दी जाएगी।
50 हजार से ज्यादा ऋण पर किसानों को छूट दी जाएगी, जैसे 50,001 से 60,000 रुपये के बीच के कर्ज पर 40,000 रुपये की माफी, 60,001 से 70,000 रुपये के बीच के कर्ज पर 30,000 रुपये की माफी, 70,001 से 80,000 रुपये के बीच के कर्ज पर 20,000 रुपये की माफी, 80,001 से 1,00,000 रुपये के बीच के कर्ज पर 10,000 रुपये की माफी और 1,00,000 रुपये से अधिक के कर्ज पर 5,000 रुपये की छूट
अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना से सरकारी खजाने पर 2,044.46 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। यह योजना केवल 1 मई 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच सहकारी बैंकों से लिए गए लोन पर ही लागू होगी। सरकार ने बताया कि इस योजना को लागू करने की जिम्मेदारी सहकारी बैंकों और राज्य की एजेंसियों को सौंपी गई है।
चुनावी वादे पर अमल और समीक्षा बैठक:
सरकार के अनुसार, यह कदम चुनाव में किए गए वादे को पूरा करने और ग्रामीण इलाकों की आर्थिक परेशानी को कम करने के लिए उठाया गया है। टीवीके नेता और राज्य मंत्री सीटीआर निर्मलकुमार ने पत्रकारों को बताया, लगभग 16,92,000 किसानों ने कृषि ऋण लिया था, जिनमें से 14,22,000 किसानों का कर्ज आज माफ कर दिया गया है। यह हमारे चुनावी वादों में से एक था।
इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में सचिवालय में एक समीक्षा बैठक भी हुई। बैठक में कृषि मंत्री आर. विनोद, सहकारिता मंत्री वी. कांथिराज, वित्त और योजना मंत्री एन. मारिया विल्सन सहित कई बड़े अधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इस फैसले की आधिकारिक जानकारी दी।
प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव:
कर्ज माफी की घोषणा के साथ ही, राज्य सरकार ने कई वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों के तबादले भी किए हैं। इनमें ई. सुंदरवल्ली को सार्वजनिक और पुनर्वास विभाग का विशेष सचिव बनाया गया है, जबकि आर. ललिता को वित्त विभाग (व्यय) का सचिव नियुक्त किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस बदलाव का मकसद राज्य की नौकरशाही को और अधिक चुस्त बनाना है।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि अब उनका मुख्य फोकस सहकारी बैंकों के जरिए इस योजना को जल्द से जल्द लागू करना है ताकि पात्र किसानों के खातों में राहत तुरंत पहुंच सके। प्रशासन खर्च की निगरानी करेगा और योजना की प्रगति की रिपोर्ट लेगा। वहीं, आने वाले दिनों में विपक्षी दलों और किसान संगठनों द्वारा लाभार्थियों की सूची पर नजर रखे जाने की संभावना है।(साभार एजेंसी)
