मोदी कैबिनेट ने 4,474 करोड़ रुपये के दो प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी

National News

(नई दिल्ली)10मार्च,2026.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने मंगलवार को रेलवे की दो परियोजनाओं को मंजूरी दे दी. इनमें सैंथिया-पाकुड़ फोर-लाइन और सांतरागाछी-खड़गपुर फोर-लाइन शामिल हैं. जिनकी कुल लागत 4,474 करोड़ रुपये है. पश्चिम बंगाल और झारखंड के पांच जिलों को कवर करने वाली ये दो परियोजनाएं भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 192 किलोमीटर तक बढ़ाएंगी।

मीडिया को जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि लाइनों की क्षमता बढ़ने से रेलगाड़ियों की आवाजाही में काफी सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा की विश्वसनीयता बेहतर होगी. मल्टी-ट्रैकिंग के ये प्रस्ताव रेल संचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ (कंजेशन) को कम करने के लिए तैयार किए गए हैं.

वैष्णव ने कहा, “ये परियोजनाएं क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से यहां के लोगों को ‘आत्मनिर्भर’ बनाएंगी, जिससे उनके लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे. इन परियोजनाओं की योजना ‘पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के आधार पर बनाई गई है, जिसका मुख्य जोर एकीकृत योजना और संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर है. ये प्रोजेक्ट्स लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे.

मंजूर की गई मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से 5,652 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिनकी आबादी लगभग 147 लाख है. क्षमता में इस बढ़ोतरी से देश के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी, जिनमें बोलपुर-शांतिनिकेतन, नंदीकेश्वरी मंदिर (शक्तिपीठ), तारापीठ (शक्तिपीठ), पटाचित्र ग्राम, धादिका वन, भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य और रामेश्वर कुंड शामिल हैं।

ये रेल मार्ग कोयला, पत्थर, डोलोमाइट, सीमेंट, स्लैग, जिप्सम, लोहा और इस्पात, खाद्यान्न, पीओएल (तेल) और कंटेनर जैसे सामानों की ढुलाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. क्षमता बढ़ने से हर साल 31 मिलियन टन (MTPA) अतिरिक्त माल ढुलाई हो सकेगी. उन्होंने कहा कि रेलवे परिवहन का पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल माध्यम है, जिससे देश के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और लॉजिस्टिक लागत कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही, इससे 6 करोड़ लीटर तेल आयात कम होगा और 28 करोड़ किलोग्राम CO2 उत्सर्जन में कमी आएगी, जो कि एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तमिलनाडु के मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित करने को भी मंजूरी दे दी है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी, “तमिलनाडु के मंदिर शहर मदुरै में स्थित मदुरै हवाई अड्डा राज्य के सबसे पुराने हवाई अड्डों में से एक है. यह दक्षिणी तमिलनाडु के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है और पर्यटन व तीर्थयात्रा को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास में योगदान मिलता है.”

मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय स्तर का दर्जा मिलने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ेगी, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी. अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्रियों और व्यवसायों को आकर्षित करने की हवाई अड्डे की क्षमता शहर के ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप है(साभार एजेंसी)

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