देश के प्रमुख बंदरगाहों के लिए जारी की गई SOP

National News

(नई दिल्ली)9मार्च,2026.

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अस्थिरता को देखते हुए भारत सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं. केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों के लिए एक व्यापक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया है. इसका मुख्य उद्देश्य व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम करना और प्रभावित कार्गो व जहाजों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करना है.

नोडल अधिकारियों की नियुक्ति
मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक प्रमुख बंदरगाह पर विभाग अध्यक्ष या उप-HOD स्तर के एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी. यह अधिकारी 24/7 उपलब्ध रहेगा और ‘सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट’ के रूप में कार्य करेगा. बंदरगाहों को इन अधिकारियों के नाम, पद और संपर्क विवरण अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने को कहा गया है.

समयबद्ध समाधान और समन्वय
SOP में स्पष्ट किया गया है कि परिचालन संबंधी किसी भी समस्या का समाधान 24 घंटे के भीतर किया जाना चाहिए. यदि मामले में सीमा शुल्क या अन्य एजेंसियां शामिल हैं, तो प्रक्रिया को अधिकतम 72 घंटों में पूरा करना होगा. बंदरगाहों के अध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे शिपिंग लाइनों, निर्यातकों और सीमा शुल्क अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें करें ताकि वास्तविक समय में चुनौतियों का समाधान हो सके.

कार्गो और जहाजों के लिए विशेष सुविधाएं
व्यापारिक नुकसान को कम करने के लिए मंत्रालय ने कई महत्वपूर्ण उपाय किए हैं.

अतिरिक्त भंडारण: मिडल ईस्ट जाने वाले कार्गो को ‘ट्रांसशिपमेंट कार्गो’ के रूप में रखने की अनुमति दी गई है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त स्टोरेज स्पेस आवंटित किया जाएगा.प्राथमिकता: मिडल ईस्ट से वापस आने वाले निर्यात कार्गो और खराब होने वाली वस्तुओं को प्राथमिकता दी जाएगी.बंकरिंग क्षमता: ईंधन की बढ़ती मांग को देखते हुए बंदरगाहों को बंकरिंग क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं.तदर्थ पोत: जो जहाज विशेष रूप से मिडल ईस्ट के कार्गो को लाने या ले जाने के लिए आएंगे, उनके लिए बर्थिंग की विशेष सुविधा दी जाएगी.
आर्थिक राहत की संभावना
मंत्रालय ने बंदरगाहों को यह अधिकार भी दिया है कि वे संकट से प्रभावित हितधारकों की मांग पर स्टोरेज रेंट, रीफर प्लगिंग शुल्क और वेसल चेंज चार्ज जैसे शुल्कों में छूट या कटौती पर विचार कर सकते हैं.

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक शिपिंग लाइनें प्रभावित हो रही हैं. सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय बंदरगाह किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें और देश के आयात-निर्यात पर इसका कम से कम असर पड़े।(साभार एजेंसी)

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