(देहरादून)28फरवरी,2026.
भारत-चीन सीमा के करीब मौजूद नीती घाटी को वैश्विक पर्यटन के मानचित्र पर चमकने का बड़ा मौका मिलने जा रहा है. यहां भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों को अल्ट्रा मैराथन में आने का मौका मिलने जा रहा है, जिसके लिए उत्तराखंड का पर्यटन विभाग विशेष प्रयास में जुटा है. खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े इस हिमालयी क्षेत्र में इस बार विदेशी पर्यटकों को लाने पर फोकस किया जा रहा है, जिसके लिए भारत सरकार से भी नियमों में कुछ शिथिलता की उम्मीद लगाई जा रही है।
वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर उभरते नए डेस्टिनेशन: सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण चमोली जिले की नीती घाटी अब सिर्फ सीमांत क्षेत्र नहीं, बल्कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर उभरते नए डेस्टिनेशन के रूप में देखी जा रही है. लगभग 4000 से 4500 मीटर की ऊंचाई पर फैली यह घाटी अपनी बर्फीली चोटियों, हरित बुग्यालों और शांत वादियों के लिए जानी जाती है. भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब स्थित होने के कारण यहां सुरक्षा के कड़े नियम लागू हैं, लेकिन अब उत्तराखंड पर्यटन विभाग इस क्षेत्र की प्राकृतिक भव्यता को दुनिया के सामने लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है।
अल्ट्रा मैराथन का आयोजन प्रस्तावित: दरअसल, आदि कैलाश की तर्ज पर नीती घाटी में भी अल्ट्रा मैराथन का आयोजन प्रस्तावित है. कार्यक्रम के अनुसार 31 मई को इस हाई-एल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन का आयोजन किया जाएगा. आयोजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
विदेशियों ने भी जताई इच्छा: दिलचस्प बात यह है कि देशी प्रतिभागियों के साथ-साथ विदेशी रनर्स ने भी इसमें भाग लेने की इच्छा जताई है. 75 किलोमीटर की चुनौती, 4500 मीटर की ऊंचाईयह अल्ट्रा मैराथन रिमखिम से मलारी और उससे आगे तक आयोजित की जाएगी. कुल मिलाकर प्रतिभागियों को लगभग 75 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी।
चुनौतीपूर्ण दौड़: ऊंचाई 4000 से 4500 मीटर के बीच होने के कारण यह दौड़ शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर चुनौतीपूर्ण होगी. ऑक्सीजन की कमी, कठिन भूगोल और बदलता मौसम इसे सामान्य मैराथन से अलग और विशेष बनाते हैं। (साभार एजेंसी)
