8वें ज्योतिष महाकुंभ में सीएम धामी ने की सहभागिता

Uttarakhand News

(देहरादून)24जनवरी,2026.

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी, देहरादून में अमर उजाला द्वारा आयोजित 8वें ज्योतिष महाकुम्भ के कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य पंडित पुरुषोत्तम गौड़ को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से आए अन्य प्रतिष्ठित ज्योतिष आचार्यों को भी सम्मान प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन प्राचीन और दिव्य ज्ञान में छिपे वैज्ञानिक रहस्यों को आम जन तक पहुंचाने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से मानव जीवन की समस्याओं, सामाजिक चुनौतियों के समाधान के साथ-साथ राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी सार्थक मार्गदर्शन प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। यह संस्कृति केवल आस्था और विश्वास पर आधारित नहीं, बल्कि गहन वैज्ञानिक दृष्टिकोण, चिंतन और शोध का परिणाम है।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि ज्योतिष भारत का अत्यंत समृद्ध, गूढ़ और वैज्ञानिक शास्त्र है। हमारे ऋषि-मुनि केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे उच्च कोटि के वैज्ञानिक भी थे। आर्यभट्ट ने खगोल विज्ञान और गणित में क्रांतिकारी सिद्धांत दिए, महर्षि पराशर ने ज्योतिष शास्त्र को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया, वराहमिहिर ने खगोल विज्ञान को समृद्ध किया और भृगु मुनि ने भविष्य कथन एवं कालगणना की परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान जिन खगोलीय घटनाओं को समझने के लिए विशाल यंत्रों का उपयोग करता है, उनके मूल सिद्धांत हमारे ऋषि-मुनियों ने सहस्रों वर्ष पूर्व ग्रह-नक्षत्रों की गति, समय-चक्र और प्रकृति के गहन अध्ययन से स्थापित कर दिए थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नासा भी यह मानने लगा है कि भारतीय ज्योतिष विज्ञान के माध्यम से कई भौगोलिक और खगोलीय घटनाओं को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र भौतिक जीवन, आध्यात्मिक चेतना और दैविक व्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करता है तथा यह सिखाता है कि मानव जीवन और ब्रह्मांड एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। सूर्य, चंद्रमा और ग्रह केवल आकाशीय पिंड नहीं हैं, बल्कि वे समय-चक्र, प्रकृति के संतुलन और मानव जीवन की प्रवृत्तियों को दिशा देने वाले महत्वपूर्ण कारक भी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया में ज्योतिष और वास्तु शास्त्र का व्यापक अध्ययन हो रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ज्योतिष जैसे पवित्र ज्ञान को पूरी जिम्मेदारी के साथ समाज के सामने रखा जाना चाहिए, ताकि यह जनकल्याण का प्रभावी माध्यम बन सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति की पताका पूरे विश्व में लहरा रही है और विभिन्न देश भारतीय संस्कृति, दर्शन, ज्ञान और विज्ञान से परिचित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार उत्तराखंड को देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी दिशा में दून विश्वविद्यालय में भारतीय संस्कृति, दर्शन और इतिहास के अध्ययन हेतु सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज की स्थापना की गई है। साथ ही आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन स्थापित किए जाने की योजना है। उन्होंने बताया कि राज्य में ज्योतिष विद्या को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड ज्योतिष परिषद का गठन भी किया गया है, जिससे युवा पीढ़ी प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान को समझकर अपने जीवन में उसका सकारात्मक उपयोग कर सके।

कार्यक्रम में स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, ग्राफिक एरा ग्रुप के अध्यक्ष श्री कमल घनसाला, अमर उजाला के संपादक श्री अनूप बाजपेई सहित अनेक ज्योतिषाचार्य एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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