(देहरादून)13जनवरी,2026.
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्रकृति का एक अनमोल औषधीय खजाना मिला है। जड़ी-बूटी शोध संस्थान (मंडल) से सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विजय भट्ट ने धारचूला के बालिंग और सीपू जैसे दुर्गम इलाकों में चागा मशरूम की पहचान की है। यह मशरूम न केवल दुर्लभ है, बल्कि कैंसर जैसी घातक बीमारी से लड़ने में भी सक्षम पाया गया है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मशरूम केवल उन्हीं भोजपत्र के पेड़ों के तनों पर उगता है जिनकी आयु 100 वर्ष से अधिक हो चुकी है। डॉ. भट्ट ने बताया कि अब तक यह माना जाता था कि चागा मशरू(मइनोनोटस ओब्लिक्वस) मुख्य रूप से साइबेरिया और रूस के ठंडे जंगलों में ही पाया जाता है। लेकिन धारचूला और नीति घाटी में 3000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर इसकी मौजूदगी ने शोधकर्ताओं को उत्साहित कर दिया है। दिखने में यह जले हुए कोयले या मधुमक्खी के छत्ते जैसा भूरा-काला नजर आता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमत:
चागा मशरूम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग है। दिल्ली सहित बड़े महानगरों में साइबेरिया व रूस से आयातित चागा मशरूम 25 से 30 हजार रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसके संरक्षण और वैज्ञानिक दोहन की दिशा में कदम उठाए जाएं तो सीमांत क्षेत्रों के ग्रामीणों को इससे आर्थिक लाभ मिल सकता है।
औषधीय चाय के रूप में होता है उपयोग
डॉ.भट्ट के अनुसार, इस मशरूम को वैज्ञानिक विधि से सुखाकर इसका पाउडर तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग शहद के साथ हर्बल चाय के रूप में होता है। इसमें विटामिन-डी2, पॉलीसैकेराइड्स और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। उन्होंने यह चाय बेंगलुरु, दिल्ली और चंडीगढ़ के कई मरीजों को भेजी है, जिनसे बहुत ही सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। खासकर कैंसर पीड़ित लोग और लीवर की बीमारी से जूझ रहे लोग इसे काफी असरदार है।
चागा मशरूम क्यों है खास:
दुर्लभ विकास- यह केवल 100 साल पुराने भोजपत्र के पेड़ के तनो पर ‘परजीवी’ के रूप में उगता है।
शक्तिशाली इम्यून बूस्टर- यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और संक्रमण को खत्म करता है।
कैंसर से लड़ाई- इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स फेफड़ों, ब्रेस्ट और लीवर के कैंसर की रोकथाम में सहायक हैं।
डायबिटीज में राहत-
यह शुगर लेवल को नियंत्रित करने और शरीर को डिटॉक्स करने में कारगर है।
विशेष सलाह
डॉ. विजय भट्ट ने आगाह किया है कि जंगली मशरूमों की पहचान करना कठिन होता है, इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी मशरूम का सीधा सेवन जानलेवा हो सकता है।(साभार एजेंसी)
