(नई दिल्ली)10जनवरी,2026
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीए एंड एफडब्ल्यू) और डाक विभाग (डीओपी) ने आज देश भर में नामित प्रयोगशालाओं तक कीटनाशक, बीज और उर्वरक के नमूनों के परिवहन के लिए एक राष्ट्रव्यापी लॉजिस्टिक्स तंत्र स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
डाक विभाग नई दिल्ली स्थित कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (एमओआरडी) के साथ सहयोग करता है
यह समझौता ज्ञापन केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया ।
इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय संचार मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री के ” विकसित भारत ” के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर डाक विभाग विश्व के सबसे व्यापक लॉजिस्टिक्स और वितरण नेटवर्कों में से एक के रूप में उभरा है। 16 लाख से अधिक डाकघरों के साथ, जिनमें से लगभग 14 लाख ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं, भारतीय डाक देश भर के प्रत्येक नागरिक को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि विभाग प्रतिदिन लाखों डिलीवरी करता है, जिसमें त्योहारों के चरम मौसम के दौरान लगभग छह लाख पार्सल डिलीवरी शामिल हैं, जो इसकी अद्वितीय पहुंच और परिचालन क्षमता को दर्शाती हैं।
यह सहयोग सेंटर फॉर रिसर्च एंड इंडस्ट्रियल स्टाफ परफॉर्मेंस (सीआरआईएसपी) द्वारा विकसित किए जा रहे पैन-इंडिया ऑनलाइन कीटनाशक, बीज एवं उर्वरक गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली का हिस्सा है। इस प्रणाली का उद्देश्य गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करना, पारदर्शिता में सुधार करना और प्रौद्योगिकी-आधारित कार्यप्रणाली के माध्यम से कृषि इनपुट के समय पर परीक्षण को सुनिश्चित करना है।
समझौते के तहत, डाक विभाग कीटनाशक, बीज और उर्वरक निरीक्षकों द्वारा एकत्र किए गए नमूनों की सुरक्षित, पता लगाने योग्य और समयबद्ध आवाजाही के लिए संपूर्ण लॉजिस्टिक्स सहायता प्रदान करेगा। अपने व्यापक डाक नेटवर्क और दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों सहित अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी का लाभ उठाते हुए, इंडिया पोस्ट नमूनों के विश्वसनीय और कुशल परिवहन को सुनिश्चित करेगा।
सेवाओं के दायरे में निर्दिष्ट बुकिंग और समेकन केंद्र, संवेदनशील नमूनों के लिए विशेष हैंडलिंग और पैकेजिंग प्रोटोकॉल, और गोपनीयता और संपूर्ण ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग के साथ क्यूआर कोड-आधारित एड्रेस मास्किंग शामिल हैं। चुनिंदा नमूनों के लिए, संरक्षण हेतु आवश्यक तापमान स्थितियों की डिजिटल निगरानी भी की जाएगी।
सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नकली और घटिया कीटनाशकों, बीजों और उर्वरकों का खतरा किसानों को भारी आर्थिक नुकसान और परेशानी पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता ज्ञापन कृषि उत्पादों की त्वरित और अधिक विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करके किसानों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नमूनों को प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने में होने वाली देरी को कम करके, यह पहल प्रवर्तन तंत्र को सुदृढ़ करेगी और बाज़ार में नकली/मिलावटी उत्पादों के प्रचलन पर अंकुश लगाने में सहायक होगी।
उन्होंने आगे कहा कि बेहतर लॉजिस्टिक्स और डिजिटल ट्रैकिंग के साथ, जो नमूने पहले प्रयोगशालाओं तक पहुंचने में 10-15 दिन लगते थे, वे अब 48 से 72 घंटों के भीतर वितरित किए जाएंगे, जिससे समय पर परीक्षण, त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई और किसानों के बीच उन्हें आपूर्ति की जाने वाली इनपुट की गुणवत्ता में बढ़ा हुआ विश्वास संभव होगा।
यह साझेदारी राष्ट्रीय कार्यक्रमों को समर्थन देने के लिए संस्थागत समन्वय को मजबूत करने और इंडिया पोस्ट की लॉजिस्टिक्स क्षमताओं का लाभ उठाने पर सरकार के फोकस को दर्शाती है। इस पहल से नियामक निगरानी में सुधार होने, कृषि क्षेत्र में क्वालिटी एश्योरेंस बढ़ने और किसानों को नकली कृषि इनपुट से होने वाले नुकसान से बचाने की उम्मीद है।(साभार एजेंसी)
