(नई दिल्ली)22दिसंबर,2025.
जल राज्य का विषय होने के कारण, जल संसाधनों से संबंधित पहलु, जिनमें इसका संरक्षण भी शामिल है, का अध्ययन, योजना, वित्तपोषण और कार्यान्वयन राज्य सरकारों द्वारा उनके स्वयं के संसाधनों और प्राथमिकताओं के अनुसार किया जाता है। केंद्र सरकार राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे उपायों और प्रयासों में सहायता करती है।
भारत सरकार जल संरक्षण की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जल संरक्षण से संबंधित विभिन्न पहल करती है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दादरा एवं नगर हवेली संघ राज्य क्षेत्र सहित पूरे देश में जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के लिए सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम इस प्रकार हैं:
जल शक्ति मंत्रालय महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दादरा एवं नगर हवेली संघ राज्य क्षेत्र सहित पूरे देश में वर्ष 2019 से जल शक्ति अभियान (जेएसए) का कार्यान्वयन कर रहा है। वर्ष 2021 से जेएसए: सीटीआर एक नियमित कार्यक्रम बन गया है, जिसका छठा संस्करण दिनांक 22.03.2025 से 30.11.2025 तक देश के सभी जिलों (ग्रामीण और शहरी दोनों) में “जल संचय, जन भागीदारी: जन जागरूकता की ओर” विषय के तहत कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसमें सामुदायिक भागीदारी और जल संरक्षण जागरूकता पर बल दिया गया है। यह अभियान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत), पर ड्रॉप मोर क्रॉप, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के अंतर्गत मरम्मत, नवीकरण और पुनरूद्धार घटक, प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कैम्पा), वित्त आयोग अनुदान आदि जैसी केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों की विभिन्न योजनाओं से समन्वित वित्तपोषण पर बल देता है।
जल शक्ति अभियान: कैच द रैन (जेएसए: सीटीआर) अभियान के तहत, खंडवा जिले ने पिछले तीन वर्षों में 7,000 से अधिक जल संरक्षण और जल संबंधी कार्य पूरे किए हैं। जिले में एक जल शक्ति केंद्र भी स्थापित किया गया है और एक जिला जल संरक्षण योजना तैयार की गई है। इसके अलावा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दादरा एवं नगर हवेली संघ राज्य क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों के दौरान जल शक्ति अभियान के तहत किए गए जल संरक्षण पहल का जिला-वार विवरण क्रमशः अनुलग्नक I, II और III में दिया गया है।
जनभागीदारी को और अधिक सशक्त बनाने के लिए, गुजरात के सूरत जिले में 6 सितंबर 2024 को “जल संचय जन भागीदारी” (जेएसजेबी) पहल शुरू की गई। यह पहल समुदायों, सीविल सोसाइटी और स्थानीय सरकारों को समग्र सामाज और समग्र सरकार के दृष्टिकोण के तहत कम लागत वाले, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल जल संरक्षण समाधानों को लागू करने के लिए सामूहिक कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित करती है। खंडवा जिले में जेएसजेबी पहल के तहत 1.48 लाख से अधिक परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
इस अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए, इसकी प्रगति की निगरानी और तकनीकी सहायता प्रदान करने हेतु राज्य और जिला स्तर पर क्रमशः राज्य नोडल अधिकारी (एसएनओ) और जिला नोडल अधिकारी (डीएनओ) नियुक्त किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, आवश्यक सहयोग प्रदान करने और प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए एसएनओ, नगर आयुक्तों, जिला मजिस्ट्रेटों (डीएम)/उपायुक्तों (डीसी), सहयोगी केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, केंद्रीय नोडल अधिकारियों (सीएनओ) और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ बैठकें आयोजित की जाती हैं। उपरोक्त के अलावा, केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी), राज्य सरकारों के परामर्श से, देश के सक्रिय भूजल संसाधनों का वार्षिक रूप से आकलन करता है। ये आवधिक आकलन सभी आकलन इकाइयों में भूजल पुनर्भरण, उपयोग और समग्र उपलब्धता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं, जिससे विभिन्न हितधारकों को सूचित निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
इसके अतिरिक्त, जल शक्ति केंद्र (जेएसके) स्थापित किए गए हैं, जो स्थानीय लोगों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने और वर्षा जल संचयन प्रणालियों के कार्यान्वयन में जिला प्रशासन का सहयोग करने के लिए समर्पित संसाधन और ज्ञान केंद्रों के रूप में कार्य करते हैं। साथ ही, सतत जल प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए जिला जल संरक्षण योजनाएं तैयार की गई हैं। इसकी प्रगति की निगरानी जेएसए: सीटीआर और जेएसजेबी जैसे ऑनलाइन पोर्टलों के माध्यम से भी की जाती है।
इसके अलावा, भारत सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को पूरे देश में कार्यान्वित कर रही है, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ जल संरक्षण और जल संचयन संरचनाएं शामिल हैं।
विभिन्न राज्यों को 15वें वित्त आयोग के संबद्ध अनुदानों के अंतर्गत वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसका उपयोग अन्य बातों के साथ-साथ वर्षा जल संचयन के लिए किया जा सकता है।
अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) में, वर्षा जल को जल निकासी ड्रेनों के माध्यम से जल निकाय में एकत्रित करने का प्रावधान है (ऐसे जल निकाय जिसमें सीवेज/अपशिष्ट जल नहीं आता है)। ‘जलभृत प्रबंधन योजना’ तैयार करके शहर, शहर की सीमाओं के भीतर वर्षा जल संचयन को सुधारने के लिए एक रोडमैप विकसित करके भूजल पुनर्भरण का संवर्धन करने की कार्यनीति बनाने का लक्ष्य रखते हैं।
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण उपायों की आवश्यकता पर पर्याप्त ध्यान देने के साथ राज्यों के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल उपाय अपनाने हेतु दिशानिर्देश तैयार किए हैं, जैसे कि एकीकृत भवन उपनियम (यूबीबीएल), दिल्ली, 2016, मॉडल भवन उपनियम (एमबीबीएल), 2016 और शहरी एवं क्षेत्रीय विकास योजना निर्माण एवं कार्यान्वयन (यूआरडीपीएफआई) दिशानिर्देश, 2014।
भारत सरकार “प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई)” को लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य खेतों में पानी की वास्तविक उपलब्धता को बढ़ाना, सुनिश्चित सिंचाई के अंतर्गत कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार करना, कृषि में जल उपयोग की दक्षता में सुधार करना, स्थायी जल संरक्षण पद्धतियों को लागू करना आदि है। पीएमकेएसवाई के तीन घटक/योजनाएं हैं, जिनमें हर खेत को पानी (एचकेकेपी), जल निकायों की मरम्मत, नवीकरण और पुनरुद्धार (आरआरआर) योजना और सतही लघु सिंचाई (एसएमआई) योजना शामिल हैं।
राष्ट्रीय जल नीति (2012) जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग द्वारा तैयार की गई है, जो अन्य बातों के साथ-साथ वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण का समर्थन करती है और वर्षा के प्रत्यक्ष उपयोग के माध्यम से जल की उपलब्धता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालती है।
भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) देश में वर्षा आधारित और बंजर भूमि के विकास के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई) के वाटरशेड विकास घटक को लागू करता है। इस योजना के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों में रिज क्षेत्र उपचार, जल निकासी व्यवस्था का उपचार, मृदा एवं नमी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, नर्सरी तैयार करना, चारागाह विकास, संपत्तिहीन व्यक्तियों के लिए आजीविका आदि शामिल हैं। डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई इन पहलों के माध्यम से बेहतर प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के प्रति किसानों की अधिक सहनशीलता सुनिश्चित करके स्थायी विकास को बढ़ावा देना चाहता है।
केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) भूजल प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने हेतु केंद्रीय क्षेत्र योजना “भूजल प्रबंधन एवं विनियमन (जीडब्ल्यूएमआर)” का कार्यान्वयन करता है। यह योजना महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दादरा एवं नगर हवेली संघ राज्य क्षेत्र सहित पूरे देश में लागू है। योजना के अंतर्गत की जाने वाली प्रमुख गतिविधियों में जलभृत मानचित्रण और सीजीडब्ल्यूबी की अन्य नियमित गतिविधियाँ शामिल हैं, जैसे भूजल स्तर एवं गुणवत्ता की निगरानी, सक्रिय भूजल संसाधनों का आकलन, तकनीकी उन्नयन के लिए वैज्ञानिक अवसंरचना को सुदृढ़ करना, जल संरक्षण एवं स्थायी उपयोग को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न जागरूकता गतिविधियाँ आदि।
केंद्रीय भूजल बोर्ड ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दादरा एवं नगर हवेली संघ राज्य क्षेत्र सहित देश के लगभग 25 लाख वर्ग किलोमीटर के संपूर्ण मानचित्रण योग्य क्षेत्र में राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण परियोजना को पूरा कर लिया है।
सक्रिय भूजल संसाधन आकलन (डीजीडब्ल्यूआरए) के अनुसार, खंडवा जिले में भूजल निष्कर्षण का स्तर वर्ष 2023 में 41.48% से बढ़कर वर्ष 2025 में 39.78% हो गया है। (साभार एजेंसी)
