“शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार और भारतीयता का समावेश समय की आवश्यकता”-राज्यपाल

Uttarakhand News

(देहरादून)10अक्टूबर,2025.

उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार और भारतीयता का समावेश समय की आवश्यकता है। यह कहना है राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) का। उन्होंने यह बात यहां राजपुर रोड़ स्थित एक होटल में आयोजित उच्च शिक्षा विभाग के दो दिवसीय चिंतन शिविर के समापन सत्र में कही।

राज्यपाल ने कहा, चिंतन शिविर ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नीति निर्माण, सुधार और नवाचार के लिए एक सार्थक मंच प्रदान किया है। शिक्षा केवल ज्ञान का प्रसार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, दृष्टिकोण और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा, देश के पास युवा शक्ति के रूप में अपार क्षमता है, यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। इस युवा शक्ति को सही दिशा देने, उसके कौशल को निखारने और उसकी क्षमता को राष्ट्र निर्माण में लगाने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालयों की है। विश्वविद्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपने छात्रों को न केवल ज्ञान दें, बल्कि उन्हें जीवन के प्रति दृष्टिकोण मूल्यों और उत्तरदायित्व की भावना को भी विकसित करें।

उन्होंने कहा, हमें 21वीं सदी को भारत की सदी बनाना है, जिसके लिए विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा के अनुरूप अपने विश्वविद्यालयों को तैयार करना होगा। उन्होंने उच्च शिक्षा में भारतीयता, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के समावेश की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिससे शिक्षा केवल रोजगार का साधन न होकर जीवन मूल्यों का संवाहक बने।

उन्होंने कहा,विद्यार्थियों की कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वे रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजक बनें। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों से “नशा मुक्त कैंपस” की दिशा में ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने उच्च शिक्षा में किए जा रहे प्रयासों और आगामी रोडमैप के बारे में बताया। सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा ने दो दिवसीय चिंतन शिविर में आयोजित हुए सत्रों और परिचर्चा के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में अपर सचिव मनुज गोयल, उपाध्यक्ष उच्च शिक्षा उन्नयन समिति डॉ. देवेन्द्र भसीन, डॉ. जयपाल सिंह चौहान सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और उच्च शिक्षा से जुडे़ अधिकारी मौजूद रहे।

शिक्षा मंत्री ने दिए इन योजनाओं के संचालन के निर्देश

  • उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश में टॉप 100 एनआईआरएफ रैंकिंग विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू करेगा।
  • उद्योग एवं उच्च शिक्षा विभाग केंद्र सरकार के साथ मिलकर राज्य के लिए इन्वेस्टमेंट इंटरफेस पोर्टल तैयार करेगा।
  • परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए स्पष्ट वस्तुनिष्ठ ढांचा विकसित करेगा।
    -दिसंबर तक सभी विश्वविद्यालयों में डिग्री प्रमाणपत्र डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
    -भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन के लिए योजनाएं संस्थागत स्तर पर लागू की जाएंगी।-हर विश्वविद्यालय, महाविद्यालय में छात्रों को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए क्रेडिट सिस्टम लागू किया जाएगा(साभार)
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