(देहरादून)25अगस्त,2025.
हाल ही हैदराबाद में आयोजित मैराथन दौड़ में चमोली जनपद की देवाल ब्लॉक की वाण गांव की भागीरथी बिष्ट (23) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। भागीरथी बिष्ट ने 2 घंटे 51 मिनट में दौड़ पूरी की। आयोजकों द्वारा भागीरथी बिष्ट को तीन लाख रूपए की धनराशि प्रदान की गई। भागीरथी की इस उपलब्धि पर जनपद चमोली सहित देवाल क्षेत्र में भी खुशी का माहौल है।
अपनी इन उपलब्धियों से चमोली जिले की भागीरथी बिष्ट ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों की संकरी पगडंडियों पर दौड़ लगाने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराने को तैयार हैं।
‘नई दिल्ली मैराथन दौड़’ में जीता गोल्ड था गोल्ड: बता दें कि भागीरथी बिष्ट ने हाल में ही दिल्ली के नेहरू स्टेडियम से आयोजित ‘नई दिल्ली मैराथन दौड़’ के 10वें संस्करण में स्वर्ण पदक हासिल किया था. भागीरथी बिष्ट ने 42.195 किलोमीटर दौड़ 2 घंटा 48 मिनट 49 सेकंड में पूरा किया। भागीरथी ने अपनी कड़ी मेहनत और हिम्मत से यह मुकाम हासिल किया है. इसके अलावा भागीरथी कई मैराथन दौड़ में प्रतिभाग कर मेडल हासिल कर चुकी हैं।
भागीरथी बिष्ट ने इससे पहले 42 किलोमीटर की मुंबई मैराथन, 25 किलोमीटर की बेंगलुरु मैराथन और जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद, अमृतसर समेत राज्य और राष्ट्रीय स्तर की कई मैराथनों में भाग ले चुकी हैं। उनमें सफलता भी हासिल की है। पिछले साल उन्होंने तुंगनाथ से दिल्ली तक आयोजित 500 किलोमीटर की ‘हरेला मैराथन दौड़’ में भी हिस्सा लिया था।
ओलंपिक 2028 में गोल्ड जीतना लक्ष्य: अब भागीरथी का लक्ष्य ओलंपिक 2028 में गोल्ड मेडल में जीतना है. जिसके लिए भागीरथी एक साल से रांसी स्टेडियम में खूब पसीना बहा रही हैं।
मेरी दिनचर्या सुबह 4 बजे शुरू होती है।मैदान में अभ्यास करने से पहले योग करती हूं और फिर दिन में 6 घंटे से ज्यादा समय तक दौड़ने का अभ्यास करती हूं। मुझे पौड़ी में एक साल हो गए हैं। यहां आकर परफॉर्मेंस में अच्छा इम्प्रूवमेंट आया है. – भागीरथी बिष्ट, एथलीट
कोच सुनील शर्मा ने भागीरथी को तराशा: अभी एथलेटिक कोच सुनील शर्मा के निर्देशन में भागीरथी कड़ी मेहनत कर रही हैं। एथलेटिक कोच सुनील शर्मा के साथ उनकी पहली मुलाकात ने उन्हें एक नई दिशा दी थी। जिससे वो अपनी प्रतिभा को पहचान सकीं और उसे विकसित करने का अवसर मिला। कोच सुनील शर्मा बताते हैं कि वो 33 सालों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दौड़ रहे हैं। साथ ही सेना समेत अन्य लोगों को भी प्रशिक्षित कर रहे हैं।
पौड़ी में मेहनत करतीं भागीरथी बिष्ट:
पिछले 5 सालों से वो भागीरथी को प्रशिक्षण दे रहे हैं.कोच सुनील शर्मा ने बताया कि ‘भागीरथी के अंदर जो क्षमता है, वो उन्होंने इससे पहले किसी अन्य खिलाड़ी में नहीं देखी. पहाड़ों में टैलेंट की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें तराशने की आवश्यकता है. फिलहाल, भागीरथी पौड़ी के रांसी खेल मैदान में तैयारी कर रही हैं.’ उनके कोच सुनील शर्मा भी भागीरथी को प्रेरित करते रहते हैं. उन्हें 2028 के ओलंपिक में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहे हैं।
एक बार मैं दूरस्थ गांव वाण गया था. तब मेरे मित्र विक्रम सिंह ने वाण में बच्चों को मैराथन के बारे में मोटिवेट करने का आग्रह किया. उनके आग्रह पर मैं बच्चों को मोटिवेट कर रहा था. तभी एक बच्ची (भागीरथी) रो रही थी. तब पता चला कि भागीरथी के पिता की मौत हो चुकी थी और मां स्कूल में मिड डे मील बनाकर परिवार का पालन पोषण कर रही हैं. उस समय भागीरथी ने बताया कि उसका सपना रन करना है. यहां अच्छे कोच नहीं है. जिसके बाद मैं भागीरथी को अपने साथ ले गया. तब से लेकर मैं निशुल्क पढ़ाई और ट्रेनिंग दे रहा हूं. भागीरथी बहुत मेहनत करती है. – सुनील शर्मा, एथलेटिक कोच
बता दें कि 23 वर्षीय एथलीट भागीरथी बिष्ट उत्तराखंड के चमोली जिले के देवाल विकासखंड स्थित वाण गांव की रहने वाली हैं।भागीरथी ने संघर्ष और संसाधनों के अभाव में दौड़ की शुरुआत की थी।भागीरथी पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं।जब भागीरथी 3 साल की थी। तभी उनके पिता की असमय मौत हो गई थी। भागीरथी पढ़ाई के साथ अपने भाई-बहनों के साथ मिलकर घर का सारा काम करती थीं।
