(देहरादून)02अक्टूबर,2026.
हेवल नदी पुनर्जीवन और वैज्ञानिक वन प्रबंधन के अभिनव मॉडल के लिए उत्तराखंड कैडर के 2009 बैच के IFS अधिकारी धर्म सिंह मीणा को Eco-Warrior Award 2026 से सम्मानित किया गया।नई दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र सिंह यादव ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
टिहरी गढ़वाल में IFS अधिकारी धर्म सिंह मीणा की पहल के तहत 126 स्प्रिंग, 28 स्ट्रीम और 16 रिचार्ज जोन में काम किया गया. इसके साथ ही 1.58 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गईं और 20.62 लाख पौधे लगाए गए।इस मॉडल में जंगल, जलस्रोत, नदी और स्थानीय समुदायों को एक साथ जोड़कर नदी पुनर्जीवन पर काम किया गया।
सूखने की कगार पर पहुंचे गए थे जलस्रोत: टिहरी गढ़वाल में कभी सूखने की कगार पर पहुंचे जलस्रोतों और धाराओं को पुनर्जीवित करने की कोशिशों ने हेवल नदी की तस्वीर बदलने का काम किया है। नदी पुनर्जीवन के लिए अपनाए गए इस मॉडल में सिर्फ नदी के तल पर काम करने के बजाय उसके पूरे जलागम क्षेत्र को केंद्र में रखा गया. जंगल, स्प्रिंग, छोटी धाराएं, रिचार्ज जोन और स्थानीय समुदायों को एक साथ जोड़कर जल संरक्षण की दिशा में काम किया गया।इसी अभिनव मॉडल के लिए उत्तराखंड कैडर के 2009 बैच के IFS अधिकारी धर्म सिंह मीणा को Eco-Warrior Award 2026 से सम्मानित किया गया है. नई दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र सिंह यादव ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया है।
स्प्रिंगशेड और वाटरशेड प्रबंधन को वन प्रबंधन से जोड़ा गया: हेवल नदी पुनर्जीवन की पहल में वैज्ञानिक स्प्रिंगशेड और वाटरशेड प्रबंधन को वन प्रबंधन से जोड़ा गया. इसके तहत 126 स्प्रिंग, 28 स्ट्रीम और 16 रिचार्ज जोन में काम किया गया। जल संरक्षण और जल संग्रहण के लिए 1,58,572 संरचनाएं तैयार की गईं, जबकि 20.62 लाख स्थानीय और जल संरक्षण में सहायक पौधों का रोपण किया गया. इन प्रयासों से करीब 438.66 मिलियन लीटर भूजल पुनर्भरण की क्षमता विकसित होने का अनुमान है।यानी नदी पुनर्जीवन की कोशिश को सीधे नदी तक सीमित रखने के बजाय उन क्षेत्रों पर काम किया गया, जहां से नदी और उसकी धाराओं को पानी मिलता है।
IIT रुड़की जैसे संस्थानों की भी ली गई मदद: खास बात यह रही कि इन कार्यों के असर को केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा गया. National Institute of Hydrology और IIT रुड़की जैसे संस्थानों के सहयोग से जल प्रवाह की निगरानी, हाइड्रोग्राफ और हाइड्रोलॉजिकल आकलन किए गए. इससे जलस्रोतों और धाराओं में होने वाले बदलावों का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करने की कोशिश की गई।
हेवल मॉडल में स्थानीय ग्रामीणों, महिलाओं, वन पंचायतों और स्थानीय संस्थाओं को भी संरक्षण प्रक्रिया से जोड़ा गया. जल स्रोतों की देखरेख, आक्रामक प्रजातियों के नियंत्रण, आजीविका गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण को एक-दूसरे से जोड़ने का प्रयास किया गया।इसके चलते नदी पुनर्जीवन को केवल पर्यावरणीय काम न रखकर स्थानीय आजीविका और सामुदायिक भागीदारी से भी जोड़ा गया।
हेवल में विकसित इस मॉडल के अनुभवों को आगे राज्य स्तर पर स्प्रिंग और नदी पुनर्जीवन की संस्थागत व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी काम हुआ।SARRA (The Spring and River Rejuvenation Authority) जैसे प्रयासों के लिए भी इस तरह के अनुभवों को महत्वपूर्ण आधार माना गया।
Eco-Warrior Award मिलने के बाद मीणा ने सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय पूरी टीम, फील्ड स्टाफ और स्थानीय समुदायों के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया।दिल्ली से सम्मानित होने के बाद देहरादून पहुंचे आईएफएसस अधिकारी धर्म सिंह मीणा ने ईटीवी भारत से बात की, उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट में स्थानीय लोगों का सहयोग लिया गया और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए चरण बद्ध तरीके से काम हुआ, इसी का नतीजा है कि इसे पुनर्जीवित किया जा सका है। हेवल की कहानी यही दिखाती है कि नदी को बचाने के लिए सिर्फ नदी में काम करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसके स्रोत, जंगल और जलागम क्षेत्र को भी साथ में पुनर्जीवित करना जरूरी है।(साभार एजेंसी)
