(नैनीताल)26 सितम्बर,2026
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार द्वारा लागू सख्त भू कानून के तहत जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देशन में नैनीताल जिले में कार्रवाई तेजी से चल रही है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा भूमि क्रय- विक्रय को पूरी तरह निष्पक्ष,पारदर्शी और कानूनसम्मत बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भू कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जाएगी।
धार्मिक एवं कृषि प्रयोजन के लिए क्रय की गई भूमि का निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप उपयोग न किए जाने के सात प्रकरणों में न्यायालय उपजिलाधिकारी, नैनीताल द्वारा उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की उत्तराखण्ड राज्य में यथाप्रवृत्त धारा 166/167 के अंतर्गत आदेश पारित करते हुए कुल 1.822 हेक्टेयर अर्थात 91 नाली 01 मुट्ठी भूमि राज्य सरकार में निहित कर दी गई है।
उप जिलाधिकारी नवाज़िश खलिक ने बताया कि राजस्व अभिलेखों तथा स्थलीय जाँच में पाया गया कि ग्राम कमड़ा, पट्टी मल्ली कुटौली एवं ग्राम शीतला, पट्टी मल्ली कुटौली में विभिन्न व्यक्तियों द्वारा धार्मिक प्रयोजन के लिए कुल 1.562 हेक्टेयर भूमि क्रय की गई थी। स्थलीय निरीक्षण के समय उक्त भूमि पर कोई धार्मिक गतिविधि संचालित नहीं पाई गई तथा भूमि खाली पड़ी हुई थी।
इसी प्रकार ग्राम सतबूंगा, पट्टी सतबूंगा में कृषि प्रयोजन के लिए क्रय की गई 0.260 हेक्टेयर भूमि का कृषि कार्य में उपयोग नहीं किया जा रहा था तथा भूमि मौके पर बंजर अवस्था में पाई गई।
संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने तथा आवश्यक अभिलेख एवं साक्ष्य प्रस्तुत करने का समुचित अवसर प्रदान किया गया। तत्पश्चात क्रय संबंधी अनुमति, राजस्व अभिलेखों, अनुमति की शर्तों, उपलब्ध साक्ष्यों एवं स्थलीय जाँच आख्या का परीक्षण करने पर यह प्रमाणित हुआ कि संबंधित भूमि का उपयोग उस विशिष्ट प्रयोजन के लिए नहीं किया गया, जिसके आधार पर उसे क्रय करने की अनुमति प्रदान की गई थी।
फलस्वरूप, न्यायालय उपजिलाधिकारी, नैनीताल द्वारा सातों प्रकरणों में संबंधित अंतरणों को विधि-विरुद्ध मानते हुए उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की उत्तराखण्ड में यथाप्रवृत्त धारा 166/167 के अधीन कुल 1.822 हेक्टेयर भूमि को समस्त भारों से मुक्त करते हुए राज्य सरकार में निहित किए जाने का आदेश पारित किया गया।
आदेश के अनुपालन में संबंधित राजस्व अधिकारियों को राजस्व अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टियाँ अंकित करने तथा भूमि के संबंध में नियमानुसार अग्रेतर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं(साभार सू वि)
