आदिवासी क्रांतिकारियों की याद में “हूल दिवस”

National News

(नई दिल्ली)30जून,2026

झारखंड में प्रतिवर्ष 30 जून को हूल दिवस मनाया जाता है। यह दिवस आदिवासी क्रांतिकारियों सिद्धो-कान्हो, चांद-भैरव और फूलो-झानो के बलिदान की याद में मनाया जाता है।

राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और गृह मंत्री अमित शाह ने हूल दिवस के अवसर पर क्रांतिकारी सिद्धो-कान्हो, चांद-भैरव, फूलो-झानो और संथाल विद्रोह के अमर वीरों तथा विरांगनाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्‍ट्रपति ने सोशल मीडिया पोस्‍ट में कहा कि इन महान सेनानियों आदिवासी समाज के शोषण के विरुद्ध और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया था।

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पोस्‍ट में कहा कि इन वीर सेनानियों ने देशभर में स्‍वतंत्रता और अन्‍याय के विरुद्ध संघर्ष की चेतना को जागृत किया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हूल दिवस के अवसर पर संथाल हूल के नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की है। सोशल मीडिया पोस्ट में श्री बिरला ने भारत की स्वतंत्रता, आदिवासी पहचान और सामाजिक न्याय के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों को याद किया। उन्होंने सिदो और कान्हू के नेतृत्व में औपनिवेशिक शासन, शोषण और अन्याय के खिलाफ ऐतिहासिक संथाल हूल शुरू करने वाले हजारों बहादुर आदिवासी पुरुषों और महिलाओं को भी श्रद्धांजलि दी। श्री बिरला ने कहा कि संथाल हुल जल, वन, भूमि, गरिमा और अस्तित्व की रक्षा के लिए लड़ा गया एक महान जन आंदोलन था। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नई ऊर्जा का संचार किया और कई अन्य आंदोलनों को प्रेरित किया। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अमर शहीदों की वीरता, बलिदान और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।(साभार एजेंसी)

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