पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी का निधन,शोक की लहर

Uttarakhand News

(देहरादून)19मई,2026

लंबे समय से बीमार चल रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का आज निधन हो गया है। उनके आकस्मिक निधन के चलते प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। पूर्व सीएम की अंतेष्टि 20 मई को पुलिस सम्मान के साथ सम्पन्न होगी।

उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी के निधन से पूरे प्रदेश और देश में शोक की लहर है। अपनी ईमानदार छवि, सादगीपूर्ण जीवनशैली और पारदर्शी प्रशासन के लिए पहचान रखने वाले मेजर जनरल बीसी खंडूरी को उत्तराखंड की राजनीति में साफ-सुथरे नेतृत्व की मिसाल माना जाता था।

मेजर जनरल बीसी खंडूरी का जीवन राष्ट्रसेवा, अनुशासन और जनकल्याण के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा। भारतीय सेना में लंबे समय तक सेवा देने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और जनता के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। सैनिक पृष्ठभूमि के कारण उनके निर्णयों में अनुशासन और स्पष्टता साफ दिखाई देती थी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल विकास और पारदर्शिता के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। उन्होंने सरकारी कार्यों में जवाबदेही बढ़ाने, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और प्रशासनिक सुधारों के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। सड़कों, आधारभूत ढांचे और ग्रामीण विकास को गति देने में उनकी भूमिका अहम रही।

केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके कार्यकाल में कई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को नई दिशा मिली। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने के प्रयासों को आज भी याद किया जाता है।

बीसी खंडूरी अपनी साफ छवि और बेबाक कार्यशैली के कारण जनता के बीच बेहद लोकप्रिय थे। राजनीतिक जीवन में उन्होंने हमेशा सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता दी। यही कारण रहा कि वे विरोधियों के बीच भी सम्मानित नेता माने जाते थे।

उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति और समाज के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक संगठनों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

प्रदेशवासियों के बीच मेजर जनरल बीसी खंडूरी एक ऐसे नेता के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे, जिन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया और ईमानदारी को अपनी सबसे बड़ी पहचान बनाए रखा।(साभार एजेंसी)

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