(देहरादून)15मई,2026.
उत्तराखंड राज्य के 11 नगर निगमों में जल्द ही पर्यावरण इंजीनियर, हाइड्रोलॉजिस्ट रखे जाएंगे। इसके लिए शहरी विकास निदेशालय ने विज्ञापन जारी करते हुए आवेदन मांगे हैं। आवेदन 23 मई तक राजपुर रोड स्थित निदेशालय भेज सकते हैं।
राज्य में केंद्र और राज्य सरकार की तमाम ऐसी योजनाएं हैं, जिनके पर्यावरणीय मानक निर्धारित हैं। इन निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि इसमें भी पर्यावरणीय जिम्मेदारियां अहम होती हैं। लिहाजा, फरवरी में धामी कैबिनेट ने तय किया था कि नगर निगमों में पर्यावरण इंजीनियर व हाइड्रोलॉजिस्ट रखे जाएं। अब शहरी विकास निदेशालय ने इसके लिए आवेदन शुरू कर दिए हैं।
आवेदक के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से रसायन, सिविल, यांत्रिकी, विद्युत या पर्यावरणीय अभियांत्रिकी में स्नातक डिग्री या समकक्ष डिग्री होनी चाहिए। आवेदक के पास किसी राजकीय संस्थान में कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए। शहरी विकास विभाग के कार्यों का अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को वरीयता दी जाएगी। चयन के समय अभ्यर्थी की आयु 50 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
ये होंगे लाभ
केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के सफल संचालन एवं क्रियान्वयन करने, निर्धारित मानकों के अनुसार निकायों की ओर से लक्ष्य प्राप्त करने, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का पर्यावरणीय दृष्टिकोण से सतत व स्थायी निस्तारण करने, केंद्र की विशेष सहायता योजना के तहत शहरी विकास विभाग में प्रशासनिक सुधारों के लिए यह विशेषज्ञ रखे जा रहे हैं। नियुक्ति संविदा के आधार पर होगी, जिसका नियत मानदेय 80 हजार से 1.30 लाख होगा। वर्तमान में स्वच्छ वायु कार्यक्रम केवल देहरादून, ऋषिकेश और काशीपुर नगर निगमों में चल रहा है।
बाकी आठ नगर निगमों में भी जल्द ही यह कार्यक्रम शुरू होगा। इसके अलावा नगर निगमों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। पर्यावरण इंजीनियर जहां ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, वायु प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण नियमों के अनुपालन की निगरानी करेंगे तो वहीं हाइड्रोलॉजिस्ट निगम क्षेत्रों में सीवर लाइनों, ग्राउंड वाटर रिचार्ज आदि की निगरानी का काम करेंगे।(साभार एजेंसी)
