(देहरादून)07मई,2027.
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने निरंजनपुर, देहरादून में राज्यभर से आए पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों एवं मत्स्य पालकों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए रेफ्रिजरेटेड फिशरीज वैन को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका का प्रमुख आधार है। उन्होंने बताया that केंद्र सरकार “प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना”, “राष्ट्रीय पशुधन मिशन”, “राष्ट्रीय गोकुल मिशन” और “पशुपालन अवसंरचना विकास कोष” जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों और पशुपालकों को सशक्त बना रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में “मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन” के तहत पशुधन इकाइयों की स्थापना की जा रही है, जिसमें पात्र लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक ऋण अनुदान दिया जा रहा है। गोट वैली और पोल्ट्री वैली योजनाओं के माध्यम से भी लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। पिछले चार वर्षों में गौ पालन, बकरी पालन और भेड़ पालन के जरिए साढ़े 11 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 60 विकासखंडों में मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स संचालित की जा रही हैं तथा प्रत्येक जनपद में मॉडल पशु चिकित्सालय बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उत्तराखण्ड को वर्ष 2030 तक खुरपका-मुंहपका रोग मुक्त राज्य बनाने के लिए चयनित किया है।
दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य में दुग्ध उत्पादन में प्रतिवर्ष लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। साथ ही “बद्री घी” को देश का पहला जीआई टैग प्राप्त होने से उत्तराखण्ड की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत हुई है।
मत्स्य पालन को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्राउट फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए 170 करोड़ रुपये की योजना संचालित की जा रही है। उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में ट्राउट हैचरी स्थापित की जा रही हैं तथा उत्तराखण्ड को हाई वैल्यू फिश प्रोडक्शन एवं एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
इस दौरान हरिद्वार के पशुपालक हरिकिशन लखेड़ा और डोईवाला के अमित सिंह ने भी अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में सौरभ बहुगुणा सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।(साभार)
