(नई दिल्ली)15फरवरी,2026.
कर्नाटक के मुख्यमंत्री श्री सिद्धारमैया ने अंतर्राष्ट्रीय बांध सुरक्षा सम्मेलन (आईसीडीएस) 2026 का सफल उद्घाटन किया। समारोह की अध्यक्षता कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार ने की। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने वीडियो संदेश के ज़रिए कार्यक्रम को संबोधित किया। सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में जल शक्ति मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी, कर्नाटक के विधायक और नई दिल्ली में कर्नाटक सरकार के विशेष प्रतिनिधि श्री टी.बी. जयचंद्र, विश्व बैंक के दक्षिण एशिया क्षेत्र के उपाध्यक्ष श्री जोहान्स जुट, बड़े बांधों के अंतर्राष्ट्रीय आयोग (आईसीओएलडी) के अध्यक्ष श्री डी.के. शर्मा, आईसीएचआरएएम, जापान के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर तोशियो कोइके, सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष श्री अनुपम प्रसाद, आईआईएससी बेंगलुरु के मैकेनिकल साइंसेज के डीन प्रोफेसर सत्यम सुवास और भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन विभाग में अतिरिक्त सचिव श्री सुबोध यादव, आईएएस उपस्थित थे।
इस सत्र में वरिष्ठ नीति निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि एक साथ एक मंच पर आए, जिन्होंने बांध सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने, संस्थागत क्षमताओं को बढ़ाने और जलवायु परिवर्तनशीलता और बुनियादी ढांचे की मज़बूती जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
उद्घाटन सत्र के बाद पूर्ण सत्र आयोजित किया गया, जिसमें वरिष्ठ नीति निर्माताओं, नियामकों और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों ने देश में बांध सुरक्षा प्रथाओं को मजबूत करने के लिए उभरती चुनौतियों, प्राथमिकताओं और आगे के रास्तों पर विचार-विमर्श किया। सत्र की अध्यक्षता बड़े बांधों पर अंतर्राष्ट्रीय आयोग (आईसीओएलडी) के अध्यक्ष श्री डी. के. शर्मा ने की और सह-अध्यक्षता विश्व बैंक की दक्षिण एशिया क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रैक्टिस निदेशक डॉ. दीना उमाली ने की। सत्र में प्रस्तुतकर्ता कनाडा के उच्चायोग के वाणिज्य मंत्री श्री एड जैगर, केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष श्री अनुपम प्रसाद, जापान के अंतर्राष्ट्रीय जल आपदा और जोखिम प्रबंधन केंद्र (आईसीएचएआरएम) के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर तोशियो कोइके, विश्व बैंक की जल संसाधन वैश्विक प्रमुख सुश्री एलीन बर्क, महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री दीपक कपूर (आईएएस) और कर्नाटक सरकार के एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन उन्नत केंद्र (एसीआईडब्ल्यूआरएम) के निदेशक (तकनीकी) डॉ. पी. सोमशेखर राव शामिल थे।
इस सत्र में बांध सुरक्षा पर विविध राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोणों को समाहित करते हुए एक सार्थक और विचारोत्तेजक चर्चा हुई। चर्चा में बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना (डीआरआईपी) के अनुभव का भी व्यापक रूप से उल्लेख किया गया, जिसे देश भर में बांध सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत सरकार की एक प्रमुख पहल के रूप में उजागर किया गया। वक्ताओं ने बताया कि डीआरआईपी ने बांधों की संरचनात्मक और परिचालन सुरक्षा में सुधार, संस्थागत क्षमताओं को बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता सहित जोखिम-आधारित निर्णय लेने को मुख्यधारा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परियोजना के परिणामों और सीखों को न केवल भारतीय राज्यों के लिए, बल्कि व्यवस्थित पुनर्वास और क्षमता निर्माण के ज़रिए अपनी बांध सुरक्षा प्रथाओं का आधुनिकीकरण करने की चाह रखने वाले अन्य देशों के लिए भी मूल्यवान बताया गया।
सत्र के समापन पर, डॉ. दीना उनाली ने चर्चा के मुख्य बिंदुओं का सारांश प्रस्तुत किया। इनमें यह बात शामिल थी कि भारतीय राज्यों में बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना (डीआरआईपी) के तहत प्राप्त अनुभव ने वैश्विक बांध सुरक्षा समुदाय के लिए बहुमूल्य सबक प्रदान किए हैं। बांध पुनर्वास में नवाचार, बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के माध्यम से नियामक ढांचे को सुदृढ़ करना और निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग इस प्रगति के केंद्र में रहे हैं। बांध सुरक्षा में संस्थागत क्षमता निर्माण पर भारत सरकार का ध्यान न केवल भारतीय राज्यों, बल्कि साझेदार देशों को भी लाभ पहुंचा रहा है, जिससे भारत बांध सुरक्षा प्रथाओं में वैश्विक स्तर पर एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित हो रहा है।
जलवायु परिवर्तनशीलता में वृद्धि और चरम जलवैज्ञानिक घटनाओं ने बांध सुरक्षा के महत्व को और भी ज़रुरी बना दिया है। बदलते जलवायु में प्रभावी बाढ़ प्रबंधन और जोखिम को न्यूनतन करने के लिए ऊपरी और निचले जलाशयों का समन्वित संचालन, एक ज़रुरी आवश्यकता के रूप में उभरा है।
कार्यक्रम में इस पर सहमति जताई गई कि बांधों के व्यवस्थित संचालन और रखरखाव के साथ-साथ ही उनकी स्थिरता पर भी अधिक जोर देने की ज़रुरत है। खराब रखरखाव वाले बांधों में संकट और विफलता का खतरा बढ़ जाता है, जबकि रखरखाव में देरी से जीवनचक्र लागत और सुरक्षा जोखिम काफी बढ़ जाते हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन, पर्यटन, मत्स्य पालन आदि जैसे अतिरिक्त राजस्व स्रोतों जैसे उपायों से बांधों के सतत् रखरखाव और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा मिल सकता है।
पूर्ण सत्र में सुरक्षित, सुदृढ़ और भविष्य के लिए तैयार जल अवसंरचना को आगे बढ़ाने में सामूहिक सोच और अंतर-संस्थागत सहयोग के महत्व पर बल दिया गया।
पूर्ण सत्र के बाद बांध सुरक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय नियामक ढांचे तथा बांधों के संरचनात्मक स्वास्थ्य मूल्यांकन और पुनर्वास सामग्री में नवाचारों के विषय पर तकनीकी और औद्योगिक सत्र आयोजित किए गए। इनमें शिक्षा जगत और उद्योग जगत के विशेषज्ञों सहित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात विशेषज्ञों ने भाग लिया।
पहले दिन का समापन बेंगलुरु के विधान सौधा में एक शानदार सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ, जिसने प्रतिनिधियों को कर्नाटक की कलात्मक विरासत का समृद्ध और गहन अनुभव प्रदान किया। मनमोहक संगीत, सुंदर नृत्य प्रस्तुतियों और पारंपरिक भावों के ज़रिए, इस शाम ने देश की सांस्कृतिक विविधता का जश्न मनाया और प्रतिभागियों के बीच संवाद के लिए एक सहज और आकर्षक मंच प्रदान किया।(साभार एजेंसी)
