(देहरादून)06नवंबर,2025.
उत्तराखंड राज्य की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आज सचिवालय परिसर में अद्वितीय उत्साह, उल्लास और सम्मान का वातावरण देखने को मिला। सचिवालय संघ द्वारा आयोजित इस भव्य समारोह में राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने पर एकता, प्रेरणा और सेवा भावना का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ हिमाच्छादित पर्वतों पर उगते सूर्य की रजत किरणों के साथ सचिवालय प्रांगण में ध्वजारोहण और श्रद्धांजलि के साथ किया गया।
कार्यक्रम में सचिवालय कर्मियों और पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से घोषणा की कि रजत जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि राज्य निर्माण की गौरवगाथा और भविष्य की दिशा निर्धारित करने का अवसर है। आयोजन में रजत जयंती पर्व को पूरे राज्य में उत्साह और भव्यता के साथ मनाने का संकल्प लिया गया।
इस अवसर पर उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले श्री रविन्द्र जुगरान, पृथ्वी सिंह नेगी, जगमोहन सिंह नेगी, प्रदीप खंडूरी, श्रीमती पुष्पलता सिल्माना, श्रीमती द्वारिका बिष्ट, श्रीमती राधा तिवाड़ी सहित कई आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया। सचिवालय प्रांगण में शहीद आंदोलनकारियों को पुष्पांजलि अर्पित की गई।
सचिवालय संघ के अध्यक्ष सुनील लखेड़ा ने कहा कि रजत जयंती केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की स्वर्णिम यात्रा का मार्ग है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में शासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और जनसेवी बनाने का संकल्प लिया गया है। प्रत्येक सचिवालय कर्मी देवभूमि की गरिमा के अनुरूप अपनी सेवा भावना को और प्रखर करेगा।
कार्यक्रम में लोक कलाकार सौरभ मैठानी, मीना उनियाल, दुर्गा सागर और सचिवालय सेवा के नवनियुक्त सदस्य सतवीर पंवार ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्होंने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर संघ के उपाध्यक्ष ने कहा कि यह पर्व आत्ममंथन का अवसर भी है, जिसमें बीते 25 वर्षों की उपलब्धियों का मूल्यांकन कर आने वाले 25 वर्षों की रूपरेखा तय की जाएगी।
सचिवालय संघ के महासचिव राकेश जोशी ने 9 मई 2025 को मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं जैसे गैरसैंण में 12 अतिरिक्त अनुभाग खोलने और अपर सचिव के दो अतिरिक्त पदों के सृजन पर शासनादेश न जारी होने पर रोष व्यक्त किया। उन्होंने इसे शीघ्र लागू करने की मांग की। साथ ही, सचिवालय एटीएम बिल्डिंग का नाम स्वर्गीय इंद्र मणि बडोनी के नाम पर रखने का आह्वान किया गया।
सभा के समापन पर सभी सदस्यों ने एक स्वर में घोषणा की— “रजत जयंती हमारा गौरव है, उत्तराखंड हमारा धर्म है, और सेवा हमारा संकल्प है।” यह पर्व देवभूमि की आत्मा की झंकार है, जो संघर्ष की ज्वाला और समर्पण की शीतलता के संगम से जन्मी है।
