(नई दिल्ली)25जुलाई,2026
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार, 25 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया. यह मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में कैबिनेट सदस्य का दूसरा ऐसा इस्तीफा है. पहला इस्तीफा 2018 में #मीटू आरोपों के बीच विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर का था.
NEET-UG 2026 परीक्षा में पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के लंबे प्रदर्शन और विपक्ष के दबाव के बाद यह फैसला लिया गया.
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में क्या लिखा?
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए पत्र में वो सारे सुधार लिखे हैं जो उन्होंने अपने कार्यकाल में किया. उन्होंने लिखा है कि पिछले चार दशकों से वे छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं.
3 मई 2026 को हुई NEET-UG परीक्षा में अनियमितता सामने आने पर सरकार ने तुरंत सीबीआई को जांच सौंपी, परीक्षा रद्द की और 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की. अगले साल से सीबीटी मोड का फैसला भी लिया गया.
उन्होंने जिम्मेदारी स्वीकार की और कहा कि परीक्षा माफिया से मेधावी छात्रों को बचाने का संकल्प लिया था. लेकिन पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से मन दुखी है. यह व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं. जंतर-मंतर और देश भर की स्थिति का राष्ट्रविरोधी ताकतें फायदा न उठाएं, देश की एकता बनी रहे और छात्रों का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे—इसीलिए इस्तीफा दिया. बच्चों को पढ़ाई और करियर पर फोकस करने दें.
प्रधान ने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया तथा राष्ट्रसेवा को अपनी प्राथमिकता बताया.
महिलाओं की भावनाओं को देखते हुए एमजे अकबर का इस्तीफा
यदि देखा जाए तो मोदी मंत्रिमंडल के कार्यकाल का ये दूसरा बड़ा इस्तीफा है. इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने अक्टूबर 2018 में कई महिला पत्रकारों द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद इस्तीफा दिया था. उस समय भी इस्तीफा मीडिया के दबाव से ही सरकार को लेना पड़ा था.
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों खासतौर पर युवा वोट बैंक के आंदोलन के दबाव में आया है, जबकि अकबर का महिलाओं की भावनाओं को देखते हुए सरकार ने लिया था. हालांकि मोदी सरकार में दबाव में हुआ ये अपने आप में बड़ा इस्तीफा माना जा सकता है, जहां युवाओं के आगे एक तरह से सरकार को झुकना पड़ा.
हालांकि सरकार के सूत्रों का मानना है कि सरकार एक परिपाटी कायम नहीं करना चाहती कि किसी भी दबाव में तुरंत इस्तीफा करवा दिया जाए. मगर सूत्रों के मुताबिक ये आंदोलन जिस तरह अलग-अलग राज्याें फैलता जा रहा था, सरकार को ये आशंका थी कि इस आंदोलन की आड़ में अराजक तत्व कहीं देश की शांति व्यवस्था को नुकसान ना पहुंचाएं. यही वजह थी कि सरकार युवाओं के दबाव में आ गई. बहरहाल अब विपक्ष भी इसे बड़ी जीत बता रहा है.
उधर, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इस्तीफे की खबर पर जश्न मनाया. सरकार और CJP के बीच वार्ता अभी भी चल रही है, और अब सीजेपी अपनी दो बची मांगों पर बात कर रही है, जिसमें जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा और लाठी चार्ज और बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक्शन. उम्मीद है कि दोनों पक्षों में सहमति भी बन जाएगी. अब देखना ये है कि सरकार नए शिक्षा मंत्री के रूप में किसकी नियुक्ति करती है(साभार एजेंसी)
