उत्तराखण्ड-हिमाचल में आपदा प्रबंधन मजबूत करने पर सहमति

Uttarakhand News

(देहरादून)20अप्रैल,2026.

पर्वतीय राज्यों की समान भौगोलिक परिस्थितियों और बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने का निर्णय लिया है। दोनों राज्य एक-दूसरे के अनुभवों, नवाचारों और कार्यप्रणालियों से सीखते हुए संयुक्त रूप से भविष्य की रणनीति पर काम करेंगे।

इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश के अपर मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का भ्रमण किया। इस दौरान सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने राज्य में आपदा न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया, जोखिम आकलन और जनजागरूकता से जुड़े कार्यों की जानकारी दी।

बैठक में बताया गया कि दोनों राज्य भूस्खलन, अतिवृष्टि, क्लाउड बर्स्ट, बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। ऐसे में अनुभवों का आदान-प्रदान कर आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

हिमाचल के अपर मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड में स्थापित भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र की सराहना करते हुए हिमाचल में भी इसी तरह की व्यवस्था विकसित करने की इच्छा जताई और तकनीकी सहयोग का अनुरोध किया। साथ ही भूदेव एप और भूस्खलन प्रबंधन प्रणालियों की भी सराहना की गई।

बैठक में आपदा के समय प्रभावी संचार और त्वरित सूचना आदान-प्रदान की अहमियत पर जोर दिया गया। रुद्रप्रयाग में विकसित DDRN प्रणाली को अन्य क्षेत्रों में लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

हिमनद झील विस्फोट से बाढ़ के बढ़ते खतरे को देखते हुए दोनों राज्यों ने इस दिशा में किए जा रहे कार्यों को साझा करने और निगरानी, चेतावनी प्रणाली तथा जोखिम न्यूनीकरण उपायों को मजबूत करने पर सहमति जताई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि सहयोग को औपचारिक रूप देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में एमओयू किए जाएंगे, जिससे तकनीक, प्रशिक्षण और संसाधनों का प्रभावी आदान-प्रदान सुनिश्चित हो सके।

इस अवसर पर अपर सचिव महावीर सिंह चौहान, डीआईजी राजकुमार नेगी, हिमाचल के अपर सचिव राजस्व निशांत ठाकुर, जेसीईओ मो. ओबैदुल्लाह अंसारी, वित्त नियंत्रक अभिषेक कुमार आनंद, यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार, एचपीएसडीएमए के पीयूष रौतेला सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।(साभार)

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