(पिथौरागढ़)24अक्टूबर,2026
आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 का भव्य शुभारंभ हुआ। पर्यटन सचिव धीराज गब्रयाल और मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी ने जोलिंगकांग से 70 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वहीं, गुंजी से 42 किलोमीटर की मैराचन को दर्जा राज्य मंत्री अशोक नवियाल और उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। आयोजन में देश के 26 राज्यों के लगभग 1,100 धावक प्रतिभाग कर रहे हैं।
करीब 4,500 मीटर की ऊंचाई पर आयोजित इस चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिता में धावकों को कम तापमान, कम ऑक्सीजन, दुर्गम पहाड़ी रास्तों और विषम भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद प्रतिभागियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। दौड़ के दौरान धावकों ने नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प भी लिया।
आदि कैलाश परिक्रमा रन के पहले संस्करण में करीब 750 पावकों ने हिस्सा लिया था, जबकि इस वर्ष लगभग 1,100 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। प्रतिभागियों की बढ़ती संख्या सीमांत क्षेत्र में साहसिक पर्यटन के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है। आयोजन का उद्देश्य आदि कैलाश क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना भी है।
आयोजन के तहत 70 किलोमीटर की मुख्य अल्ट्रा मैराथन आदि कैलाश क्षेत्र से शुरू होकर छियालेख तक पहुंचेगी और गुंजी में समाप्त होगी। इसके साथ ही 42 किलोमीटर की मैराथन भी आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता में महिला और पुरुष प्रतिभागियों के लिए अलग-अलग आयु वर्ग निर्धारित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऑनलाइन माध्यम से धावकों को संबोधित करते हुए कहा कि आदि कैलाश क्षेत्र में इस तरह के आयोजन उत्तराखंड की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों की आजीविका के अवसरों को समृद्ध करना है।
मुख्यमंत्री ने पूर्व में आयोजित हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन का उल्लेख करते हुए बताया कि उसमें 22 राज्यों के धावकों ने प्रतिभाग किया था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस आयोजन का उल्लेख किया था, जिसके बाद क्षेत्र के प्रति पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आकर्षण बढ़ा।
आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 से सीमांत क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, साहसिक पर्यटन की संभावनाओं और उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने का अवसर मिल रहा है। इससे स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही क्षेत्र को नई पर्यटन पहचान दिलाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।(साभार)


