RBI देगा सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ का लाभांश

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(नई दिल्ली)22मई,2026

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का लाभांश देने की घोषणा की। इस फैसले से पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण बढ़ते आयात बिल और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बीच सरकारी खजाने को मजबूत सहारा मिलेगा. यह अधिशेष वित्त वर्ष 2024-25 के 2.69 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 6.7 प्रतिशत अधिक है, जो केंद्रीय बैंक की मजबूत आय स्थिति को दर्शाता है. आरबीआई ने अपने बयान में कहा कि जोखिम प्रावधान और वैधानिक कोष में हस्तांतरण से पहले उसकी शुद्ध आय वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 3.96 लाख करोड़ रुपये रही, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 3.13 लाख करोड़ रुपये थी।

केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट 31 मार्च, 2026 तक 20.61 प्रतिशत बढ़कर 91,97,121.08 करोड़ रुपये हो गई, जो उसकी परिसंपत्तियों और देनदारियों में उल्लेखनीय विस्तार को दर्शाती है। आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिदृश्य, विशेषकर जोखिमों का आकलन किए जाने के बाद अधिशेष हस्तांतरण को मंजूरी दी गई. यह बैठक गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में आयोजित हुई. बयान के मुताबिक, संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचा (ईसीएफ) आरबीआई को आकस्मिक जोखिम बफर (सीआरबी) को बैलेंस शीट के 4.5 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने का लचीलापन प्रदान करता है।

आरबीआई ने कहा, मौजूदा वृहद-आर्थिक परिस्थितियों, बैंक के वित्तीय प्रदर्शन और पर्याप्त जोखिम बफर बनाए रखने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय निदेशक मंडल ने 2025-26 के लिए 1,09,379.64 करोड़ रुपये सीआरबी में डालने का निर्णय लिया. यह एक साल पहले के 44,861.70 करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है. आकस्मिक जोखिम बफर का स्तर आरबीआई के बैलेंस शीट का 6.5 प्रतिशत रखा गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 7.5 प्रतिशत था. आरबीआई ने कहा, ‘केंद्रीय निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल 2,86,588.46 करोड़ रुपये की अधिशेष राशि केंद्र सरकार को हस्तांतरित करने को मंजूरी दी.’

इस बैठक में डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे, पूनम गुप्ता, शिरीष चंद्र मुर्मू और रोहित जैन शामिल हुए. इसके अलावा, वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू और निदेशक सतीश काशीनाथ मराठे, रेवती अय्यर, सचिन चतुर्वेदी, आनंद गोपाल महिंद्रा, वेणु श्रीनिवासन एवं पंकज रमणभाई पटेल भी बैठक में मौजूद रहे। पश्चिम एशिया संकट के चलते ऊर्जा, उर्वरक और अन्य जिंसों की कीमतों में तेज वृद्धि होने से भारत का आयात व्यय बढ़ गया है। साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने से आयात और भी महंगा हो गया है। भारत कच्चे तेल की अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है।(साभार एजेंसी)

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