(नई दिल्ली)17मई,2026
भारत और नीदरलैंड ने अपने रिश्तों को नई ऊंचाई देते हुए रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डच प्रधानमंत्री रोब जेट्टेन के बीच द हेग में हुई अहम बैठक के बाद दोनों देशों ने रक्षा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, क्रिटिकल मिनरल्स और व्यापार समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री मोदी इन दिनों यूरोप के चार देशों के दौरे पर हैं और इसी कड़ी में वह दो दिन की यात्रा पर नीदरलैंड पहुंचे। दोनों नेताओं की बातचीत में वैश्विक भू-राजनीतिक हालात, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक रास्तों पर पड़ रहे असर जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हुई।
होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बाधित होने पर चिंता:
इस बैठक के दौरान भारत और नीदरलैंड ने साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित होना चिंता का विषय है। दोनों देशों ने समुद्री मार्गों पर स्वतंत्र आवाजाही और वैश्विक व्यापार को सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया। यह इलाका दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है क्योंकि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा की और कहा कि इस संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकाला जाना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर स्थायी और न्यायपूर्ण शांति का समर्थन किया।
‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप रोडमैप’ भी लॉन्च
भारत और नीदरलैंड ने एक ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप रोडमैप’ भी लॉन्च किया, जिसके तहत व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा दोनों देशों ने ग्रीन हाइड्रोजन के विकास के लिए एक संयुक्त रोडमैप भी शुरू किया। रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों और तकनीक के संयुक्त निर्माण की संभावनाएं तलाशने पर सहमति जताई। इसके तहत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और जॉइंट वेंचर मॉडल पर भी काम किया जाएगा।
नीदरलैंड यूरोप में भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार:
वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 27.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं नीदरलैंड भारत में चौथा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक भी है। रॉटरडैम पोर्ट को भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप का अहम प्रवेश द्वार माना जाता है। इस बैठक में विज्ञान, स्वास्थ्य, कृषि, जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा और समुद्री विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। दोनों देशों के बीच हुए समझौतों से सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य, संस्कृति, जल प्रबंधन और कृषि क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
माइग्रेशन और मोबिलिटी को लेकर समझौता:
भारत और नीदरलैंड के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता माइग्रेशन और मोबिलिटी को लेकर भी हुआ है। इससे भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए नीदरलैंड में शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर भी दोनों देशों ने साझा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र स्वतंत्र, खुला और शांतिपूर्ण होना चाहिए तथा यहां किसी तरह का दबाव या संघर्ष नहीं होना चाहिए। माना जा रहा है कि यह संदेश चीन की बढ़ती आक्रामक गतिविधियों के बीच दिया गया है।
आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति:
इस बैठक के दौरान डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ भारत का समर्थन दोहराया। दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने की बात कही और किसी भी तरह के दोहरे मापदंड का विरोध किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत-नीदरलैंड संबंधों में काफी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, बाजार आधारित अर्थव्यवस्था और जिम्मेदार वैश्विक व्यवहार जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की सोच एक जैसी है। मोदी ने यह भी कहा कि नीदरलैंड की वि
