सचिवालय संघ,”दीपक जोशी” बने अध्यक्ष

Uttarakhand News

(देहरादून)16मई,2026.

उत्तराखंड सचिवालय में पिछले कई दिनों से चल रहे चुनावी दंगल का परिणाम घोषित हो गया है। विभिन्न पदों पर हुए चुनाव में जहां कई सचिवालय सेवा के कर्मियों को निराशा हाथ लगी है, तो वहीं जीत के साथ कई प्रत्याशियों के चेहरे भी चमक उठे हैं। इसमें सबसे बड़े खिलाड़ी के रूप में दीपक जोशी सामने आए हैं, जिन्होंने अध्यक्ष पद पर शानदार जीत हासिल की है।

बता दें कि उत्तराखंड सचिवालय में पिछले कई दिनों से जारी चुनावी दंगल का आखिरकार परिणाम सामने आ गया है। सचिवालय संघ के द्विवार्षिक चुनाव में कर्मचारियों ने अपने नए प्रतिनिधियों का चयन कर लिया है. चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा।

दीपक जोशी की शानदार जीत: वहीं, कई चेहरे जीत के साथ नई जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं. इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा अध्यक्ष पद को लेकर रही, जहां दीपक जोशी ने एक बार फिर अपनी मजबूत पकड़ साबित करते हुए शानदार जीत दर्ज की।

दरअसल, उत्तराखंड सचिवालय संघ के चुनाव को लेकर पिछले काफी समय से माहौल पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा हुआ था। सचिवालय के भीतर अलग-अलग खेमों में बंटे कर्मचारी अपने-अपने प्रत्याशियों के समर्थन में खुलकर प्रचार कर रहे थे।

पुरानी कार्यकारिणी से जुड़े कई पदाधिकारी भी चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों को समर्थन देते दिखाई दिए. वहीं, दूसरी तरफ नए चेहरे भी कर्मचारियों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार सक्रिय रहे. सबसे ज्यादा निगाहें अध्यक्ष पद के चुनाव पर टिकी हुई थीं।

दीपक जोशी-प्रदीप पपनै के बीच हुआ मुकाबला: अध्यक्ष पद के लिए दीपक जोशी और प्रदीप पपनै के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा था। प्रदीप पपनै को जहां पुराने पदाधिकारियों और एक बड़े समूह का समर्थन मिल रहा था, तो वहीं दीपक जोशी ने चुनाव प्रचार के दौरान आक्रामक रणनीति अपनाई और लगातार कर्मचारियों के बीच सक्रिय बने रहे।

मतदान के बाद जब परिणाम सामने आए तो दीपक जोशी ने शानदार जीत हासिल कर सभी चर्चाओं पर विराम लगा दिया. चुनाव में दीपक जोशी को कुल 594 वोट मिले. जबकि, उनके प्रतिद्वंदी प्रदीप पपनै को 485 वोट प्राप्त हुए।

इस तरह दीपक जोशी ने 109 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर सचिवालय संघ के अध्यक्ष पद पर फिर कब्जा जमा लिया. उनकी जीत को सचिवालय राजनीति में बड़ी वापसी और मजबूत जनसमर्थन के रूप में देखा जा रहा है. दीपक जोशी की जीत के बाद उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

वहीं, चुनाव परिणाम घोषित होते ही समर्थकों ने खुशी जताई और एक-दूसरे को बधाई दी. सचिवालय परिसर में पूरे दिन चुनावी चर्चाओं का माहौल बना रहा. कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा रही कि दीपक जोशी ने चुनाव प्रचार के दौरान जिन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, उसका फायदा उन्हें मतदान में मिला।

अध्यक्ष पद के अलावा अन्य पदों पर भी कई दिलचस्प मुकाबले देखने को मिले. वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर राकेश जोशी ने जीत हासिल की. उन्होंने अभिनव भट्ट को कड़ी टक्कर देते हुए चुनाव अपने नाम किया है वहीं, उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भी कांटे की टक्कर देखने को मिली. इस पद पर संजय कुमार शर्मा ने जीत दर्ज की।जबकि, जगत सिंह डसीला और दिनेश उनियाल को हार का सामना करना पड़ा।

महिला उपाध्यक्ष पद पर प्रमिला टम्टा ने बड़ी जीत हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है ।प्रमिला टम्टा को कुल 630 वोट मिले. जबकि, उनकी प्रतिद्वंदी रेनू भट्ट को 451 वोट प्राप्त हो सके। इस तरह प्रमिला टम्टा ने बड़े अंतर से जीत हासिल कर महिला कर्मचारियों के बीच अपनी लोकप्रियता साबित कर दी।

महासचिव पद पर भी मुकाबला काफी अहम माना जा रहा था। इस पद पर राजेंद्र रतूड़ी ने जीत हासिल की। उन्होंने विमल जोशी को बड़े अंतर से हराते हुए महासचिव पद अपने नाम किया। सचिवालय संघ की नई कार्यकारिणी में महासचिव पद को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. क्योंकि, संगठन की गतिविधियों और कर्मचारियों के मुद्दों को आगे बढ़ाने में इस पद की बड़ी भूमिका रहती है।

इसके अलावा सचिव पद के चुनाव में अतुल कुमार सिंह ने जीत हासिल की. उन्हें कुल 498 वोट मिले. उन्होंने अमित कुमार और पुष्कर सिंह नेगी को हराकर यह पद अपने नाम किया. सचिवालय संघ के अन्य पदों पर भी चुनावी मुकाबले हुए, जिनमें कई नए चेहरे उभरकर सामने आए हैं।

सचिवालय संघ के चुनाव को लेकर पिछले कई हफ्तों से कर्मचारियों के बीच जबरदस्त सरगर्मी बनी हुई थी. चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशियों ने कर्मचारियों से कई वादे किए. कर्मचारियों के हितों, पदोन्नति, सुविधाओं और कार्य परिस्थितियों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए. यही वजह रही कि इस बार चुनाव को लेकर कर्मचारियों में खासा उत्साह दिखाई दिया।

अब चुनाव परिणाम आने के बाद सचिवालय में नई कार्यकारिणी का निर्वाचन हो चुका है और कर्मचारियों को अपने नए प्रतिनिधि मिल गए हैं. हालांकि, चुनाव खत्म होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई कार्यकारिणी चुनाव के दौरान किए गए वादों को किस हद तक पूरा कर पाएगी. सचिवालय कर्मचारियों की उम्मीदें नई टीम से काफी बढ़ गई हैं।

कर्मचारियों का मानना है कि नई कार्यकारिणी को केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहिए. बल्कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे. सचिवालय में लंबे समय से लंबित कई मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर कर्मचारी लगातार आवाज उठाते रहे हैं. ऐसे में नई टीम के सामने अब कर्मचारियों का भरोसा बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी।

फिलहाल, सचिवालय संघ का चुनावी दंगल समाप्त हो चुका है और नई कार्यकारिणी के गठन के साथ सचिवालय की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई टीम कर्मचारियों के हितों के लिए कितना प्रभावी काम कर पाती है और चुनावी वादों को जमीन पर उतारने में कितनी सफल रहती है(साभार )

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