(नई दिल्ली)14अप्रैल,2026
सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री होंगे। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद नए मुख्यमंत्री के लिए उनका नाम घोषित कर दिया गया है। सम्राट चौधरी बुधवार, 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। समर्थकों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
नेतृत्व परिवर्तन से बदले समीकरण:
बिहार में सत्ता परिवर्तन के साथ ही राजनीतिक समीकरण भी बदल गए हैं। नितीश कुमार के इस्तीफे के बाद यह बदलाव संभव हुआ।
भाजपा ने नए नेतृत्व के रूप में सम्राट चौधरी पर भरोसा जताया है। इसे पार्टी की रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है।
आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर यह निर्णय अहम माना जा रहा है। सियासी हलकों में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है।
संगठन और अनुभव बना ताकत:
सम्राट चौधरी लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। उन्होंने पार्टी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी उनकी भूमिका अहम रही है। सरकार में मंत्री और उपमुख्यमंत्री के तौर पर अनुभव हासिल किया।
उनकी प्रशासनिक क्षमता को पार्टी ने प्राथमिकता दी है। यही वजह है कि उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया।
कल होगा शपथ ग्रहण:
कल शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हो सकता है। राजभवन में इसकी तैयारियां शुरू होने की चर्चा है।
नई कैबिनेट को लेकर भी मंथन जारी है। कौन-कौन मंत्री बनेगा, इस पर विचार किया जा रहा है। संतुलन साधने की कोशिश पार्टी स्तर पर चल रही है। औपचारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल:
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने की खबर से कार्यकर्ताओं में खुशी है। पार्टी कार्यालयों में जश्न का माहौल देखा जा रहा है।
समर्थकों ने मिठाइयां बांटकर खुशी जाहिर की। सोशल मीडिया पर भी बधाइयों का दौर जारी है।
इसे भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इसका असर दिखने की उम्मीद है।
आगे की रणनीति पर टिकी नजर:
अब सभी की नजर नई सरकार की कार्यशैली पर टिकी है। विकास और सुशासन को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।
नई सरकार के एजेंडे को लेकर चर्चा तेज है। राज्य में तेजी से फैसले लिए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
सम्राट चौधरी का सफर:
सन 1968 में 16 नवंबर को बिहार के मुंगेर जिले के लखनपुर में जन्म।
सन 1990 में राजनीति में पदार्पण किया।
मई 1999 में बिहार सरकार में कृषि मंत्री बने।
नवंबर 1999 में कम उम्र होने के कारण विवाद के बाद मंत्री पद से हटाए गए।
सन 2000 में परबत्ता निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार विधायक चुने गए।
सन 2010 में परबत्ता सीट से फिर से विधायक चुने गए और विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक बने।
जून 2014 में आरजेडी छोड़कर जेडीयू में शामिल हुए और जीतनराम मांझी की सरकार में शहरी विकास और आवास मंत्री बने।
सन 2017 में बीजेपी में शामिल हुए और पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए।
सन 2020 में विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए चुने गए।
सन 2021 में पंचायती राज मंत्री बनाए गए।
अगस्त 2022 में बिहार विधान परिषद में विपक्ष के नेता बनाए गए।
मार्च 2023 में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए गए।
जनवरी 2024 में बिहार के उप मुख्यमंत्री बने।
सन 2025 में तारापुर से विधायक चुने गए।
नवंबर 2025 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में 41वीं विधानसभा में उप मुख्यमंत्री बनाए गए।
भगवा पगड़ी की कहानी
बिहार में भाजपा की सत्ता में वापसी तक भगवा पगड़ी पहनने के ऐलान के कारण उन्हें सुर्खियों में ला दिया। उनका विवाह ममता कुमारी से हुआ है और उनके एक बेटा और एक बेटी है। सम्राट चौधरी ने मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की है। वे डॉक्टरेट हैं। हालांकि उनकी डिग्रियों की प्रामाणिकता को लेकर आरोप लगाए जाते रहे हैं। सन 2010 के चुनाव में उनकी ओर से दिए गए शपथ पत्र में उनकी शिक्षा सातवीं कक्षा उत्तीर्ण बताई गई थी। वे वैसे पेशे से वकील हैं। बताया जाता है कि सम्राट चौधरी ने बिहार में भाजपा को सत्ता में लाने और नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की कसम खाकर भगवा पगड़ी (मुरैठा) पहनी थी। वे तब से हमेशा भगवा पगड़ी पहनते हैं।(साभार)
