(देहरादून)26मार्च,2026.
उत्तराखंड समेत हिमालयी राज्य हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान को संयुक्त परियोजनाओं, अनुसंधान अध्ययनों एवं क्षमता विकास कार्यक्रमों में सहयोग करेंगे।
हिमालय के हरित आवरण, पर्यावरण एवं समावेशी सामाजिक-आर्थिकी को सुरक्षा देने की दिशा में उत्तराखंड ने पहल करते हुए अन्य राज्यों को भी साझेदार बनाया है। इसके लिए पांच सूत्र भी तय किए गए हैं। इस संबंध में गठित हिमालयी राज्यों से समन्वयन और नीति निर्धारण परिषद के स्वरूप में आंशिक संशोधन किया गया है।नियोजन प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम इस संबंध में आदेश जारी किया है।
हिमालयी प्रदेशों की भौगोलिक परिस्थितियां तो समान हैं ही, समस्याएं एवं चुनौतियां भी लगभग एक जैसी हैं। पूरा हिमालय क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील भी है। ऐसे में साझेदारी के भाव से समन्वय के आधार पर नीति निर्धारण करते हुए साझी चुनौतियों से आसानी से निपटा जा सकेगा। इसके दृष्टिगत गठित परिषद के शासी निकाय के स्वरूप में आंशिक परिवर्तन करते हुए उसके संदर्भ एवं शर्तें भी तय की गईं हैं।
हरित रोजगार व उद्यमों को प्रोत्साहन
परिषद के उद्देश्य में विकास के लिए साक्ष्य आधारित रणनीतियों के साथ वास्तविक समय योजना, निगरानी और संचार के लिए एआइ, जीआइएस का उपयोग करने, कार्बन उत्सर्जन कम करते हुए प्रकृति सकारात्मक विकास को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है। युवाओं और समुदायों को जल, भूमि और जैव विविधता की निगरानी में शामिल करते हुए कृषि, हस्तकला, पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा में हरित रोजगार व स्थानीय उद्यमों को विकसित किया जाएगा। राज्यों के बीच सीख एवं सुगठित नीति निर्माण को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
हिमालयी डिजिटल वेधशाला
परिषद के पांच प्रमुख घटक के तौर पर डिजिटल नवाचार एवं स्मार्ट हिमालयी विकास में डिजिटल वेधशाला, स्मार्ट निर्णय प्लेटफार्म के रूप में जलवायु अवसंरचना एवं आपदा जोखिम के लिए समेकित विश्लेषण किया जाएगा। पर्यावरण, अर्थव्यवस्था एवं सामाजिक समावेशन संकेतकों का मानचित्रण कर डिजिटल हिमालयी एटलस बताया जाएगा। शीघ्र चेतावनी, टेलीमेडिसिन, ई-लर्निंग एवं बाजार संबंध समाधान के रूप में सम्मिलित किए गए हैं।
सतत प्राकृतिक संसाधन एवं पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन में जल, वन, जैव विविधता का एकीकृत संरक्षण, प्रकृति आधारित पर्यटन एवं पारस्थितिकी उद्यमों को प्रोत्साहन मिलेगा। सिविक साइंस आधारित जलस्रोत एवं जलागम निगरानी होगी। आजीविका, उद्यमिता एवं रोजगार सृजन के अंतर्गत हिमालयी स्टार्टअप, हस्तकला, जैविक उत्पाद एवं पर्यटन सेवाओं के लिए डिजिटल बाजार और महिलाओं के नेतृत्व में सहकारिता व कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार सृजन पर बल दिया गया है।
सीएम की अध्यक्षता में शासी निकाय
परिषद के शासी निकाय के अध्यक्ष मुख्यमंत्री हैं, जबकि टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय, पद्मभूषण डा अनिल प्रकाश जोशी, सेवानिवृत्त वन्यजीव निदेशक डा जीएस रावत, पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, शिक्षाविद गोविंद सिंह व सुशांत राज मुख्यमंत्री की ओर से नामित सदस्य हैं।
अन्य सदस्यों में प्रमुख सचिव नियोजन, वित्त प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण प्रमुख सचिव, पर्यावरण निदेशक सम्मिलित हैं। सेतु आयोग के निदेशक इसके सदस्य सचिव एवं यूकास्ट के महानिदेशक प्रो दुर्गेश पंत इसके संयोजक बनाए गए हैं। कार्यकारी निकाय के अध्यक्ष मुख्य सचिव हैं, जबकि इसके सात सदस्य हैं।
नीति आयोग एवं केंद्र से सहयोग की अपेक्षा
प्रदेश सरकार को अपनी इस पहल में नीति आयोग एवं केंद्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा है, ताकि केंद्रीय मंत्रालयों, हिमालयी राज्यों एवं विशिष्ट एजेंसियों के बीच नीति समन्वय को सुगम बनाया जाए। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि परिषद के निर्णयों, नीतियों या कार्यप्रणाली से जुड़े किसी भी विवाद या विधिक प्रक्रिया का निपटारा देहरादून स्थित न्यायालयों में किया जाएगा।(साभार एजेंसी)
